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महाकाल की खोज में

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  Mahakal ki khoj महाकाल की खोज में निकली है सूरज की किरण, महाकाल की खोज में, पर महाकाल स्वयं विराजे, महाकाली की गोद में। कौन नाप सका है उस गहराई को, कौन जान सका उस अनंत को? महाकाली की थाह कहाँ, जहाँ खो जाए स्वयं का अस्तित्व। बिन मंज़िल की राह कहाँ, और राह मिले तो अंत कहाँ? जन्मों-जन्मों की शोध लगे, फिर भी परम का अंत कहाँ? किसी के पक्ष में नहीं, किसी के विरोध में नहीं, सत्य की तलाश है हमें, अपने ही भीतर के बोध में कहीं। खोजना है हमें, सोचना है हमें— आखिर यह खोज क्या है? और क्या खोजना है हमें? क्या मंदिरों में खोजें उसे, क्या आकाश में ढूँढ़ें उसे? क्या शास्त्रों के शब्दों में, या संसार के हर कण में खोजें उसे? जिसे पाने की चाह लिए, हम जीवन भर भटकते हैं, वही तो हर श्वास में है, जिससे हम स्वयं धड़कते हैं। ईश्वर की खोज नहीं, ईश्वर की आशा नहीं— ईश्वर तो स्वयं अस्तित्व है, उससे अलग कोई भाषा नहीं। वह पत्थर में, वह प्राणी में, वह तुममें और मुझमें है। वह प्रकाश की हर किरण में, वह अंधकार की गहराई में है। बस दृष्टि बदलनी है, बस इतना-सा बोध होना है— जिसे ...

माया का संसार

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माया का संसार माया का संसार तुम्हारा माया का संसार,  एक तरफ लगे  पासा दूजे तरफ तेज धार।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। १ **" जैसे उपजी काया से काया वैसे आई माया,  दूर का वासी भाई लगे, अपना भाई पराया,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। २ *** दूर बैठा वह देख रहा, तुम्हारी करतूतों को,  उसकी तरफ पीठ करके पूज रहे हो भूतों को,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ३ *** भूत तुम्हारे साथ खड़े हैं, आज अभी और कल,  तूने प्रभुनाम से बांध रखा, क्या मेरा रूप-विशाल।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ४ *** आँख खोल के देख जगत मे, मेरा क्या परमान,  आँख बंद कर देख पायेगा, जब करेगा मेरा ध्यान।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ५ *** जो सताता, जो सताया जाता, मेरा सबसे नाता,  मै ही कर्म,मै कर्ता - कारण, मै ही दण्ड, सुखदाता।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ६ *** तेरे सुख के लाखों उपाय, एक भी पाए तु तर जाय,  और किसी को जग ना भाये, देख पिछे,हमी को पाए।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ७ *** ऐसा बनाया...

स्वर शिव

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 आओ हम स्वर बन जाए,  कोई राग रंग रचाए,  यहाँ सब कुछ है, लय की एक धारा,  स्वर से चलता, है जग सारा,  एक समय मे ,हम एक ही सास लेते,  या अंदर आते, या बाहर जाते,  यही तो लय है, यही है  संगीत,  बहे जाओ स्वर मे,स्वर का बनके मीत,  जो हमेशा मेरे सांसो से आता जाता,  वही मुरली वाला वही है विधाता,  नापो,कभी अपने सांसों की, गहराई,  पा लोगे अपनी प्रभुताई,  जिसे हमन खोजा, सदा दर के बाहर,  वह आराम से  बसा हुआ मेरे अंदर,  या यह कहें की वही देखते है,  यह भ्रम है हमारा की हम देखते हैं,  अंतरात्मा की परछाई मिटाना पड़ेगा,  फिर शिव मे एक हो जाना पड़ेगा,  शिव,नाम ही है एक होने का,  ज्योति स्वरूप दो कोने का,  वही दो हैं सांसें, एक आती एक जाती,  कहीं भी रखो स्थिर अपनी छाती, ब्रम्हांड की नाद मे, होकर सवार,  खोलो अपनी स्वर के द्वार,  स्वर को मिलाना, मानो शिव हो जाना,  धुन मधुर बंशी की बन जाना,  आओ हम स्वर बन जाएं,  कोई राग रंग रचाए। 

लहरों की औकात

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  बेशक तुम लहर हो, बारिश की बूंदों की,  हम तो हैं लहर आंधी और तूफान की,  लहर के उपर लहर तुम्हारी,  छोटी सी है शहर तुम्हारी,  तुम जैसों से ,तुम टकरा कर,  मिट जाना है मुस्करा कर,  तुम जैसे ही ,बहुतों की कहानी है वही,  संतुष्ट हो, पूर्ण हो माना की सबसे कही,  तुम जी लेते हो उफ़ ना करते,  मिट जाते पर, उफ ना करते,  हम वह लहर हैं,  जो टकरा कर नहीं जन्मा,  चोट खाकर नहीं जन्मा,  था शांत समंदर का सन्नाटा भारी,  तभी,भार हवाओं पे,कोई दे दी भारी,  तब से ,चला हूँ मै, नहीं मेरा ,कोई बाधा,  तुम पुरा गोल- मोल , मै बस,थोड़ा आधा,  तुम्हारा पल भर का, आना जाना है,  इस लहर का सफर , सदियों पुराना है,  बेशक तुम लहर हो बारिश के बूंदों की.....  हम तो हैं लहर आंधी और तूफान की।  बेशक तुम्हे लगता होगा , हम हैं महान,  खोल रखी तुमने भी मोहब्बत की दुकान,  भर रखी होगी तूने, कस कस कर फुटकर समान,  समझ बैठा है तूने, मै बनिया बड़ा महान,   हम लहरों पे डाल प्रेम का, सुंदर सुंदर तोफा,  हम सदिओं...

देश की दिशा बदलने वाली है

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   देश की दिशा बदलने वाली है   — एक समग्र दृष्टिकोण से भारत का बदलता भविष्य भारत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जानिए धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक बदलावों के जरिए कैसे देश की दिशा बदल रही है। यह लेख भारत के भविष्य की गहराई से पड़ताल करता है। प्रस्तावना: क्या देश सच में बदल रहा है? भारत, जो सदियों से विविधताओं, संघर्षों और संस्कृतियों का संगम रहा है, आज नए युग की दहलीज पर खड़ा है। धार्मिक जागरण, सामाजिक सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राजनैतिक चेतना — ये चार स्तंभ आज देश की दिशा तय कर रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि क्या देश बदलेगा, सवाल है कि हम उसे किस दिशा में बदलना चाहते हैं। क्या हमारी दिशा जन कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ रही है, या किसी स्वार्थ, स्वहित के साथ दूसरों की हानि के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।  हम चर्चा करेंगे उसकी जो हो सकती है या होने की दिशा मे है, हम उसकी बात नहीं करते जो किया जा सकता था। क्योकि जो समय की धारा बदल जाए ऐसी छमता एक दिन मे नही आती, बल्कि यह छमता धीरे-धीरे बलवान होती है और गति करती है।   धार्मिक चेतना का पु...

Four piller of life

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 Life stay On four piller जीवन के चार स्तम्भ जीवन हमेशा से किसी एक आधार पर नहीं टिकी, जीवन के चार पिलर पर टिकी हुई है, अगर इनमे से कोई भी खंबा गिरा तो जीवन रूपी मकान धराशाई हो जाएगा।  1)- सूर्य - सूर्य हमारे जिवित होने का सबसे पहला स्तम्भ कहा जा सकता है, जिसने अपने ताप ऊर्जा के निश्चित दूरी पर धरती को स्थान दिया साथ ही अपनी गुरुत्व से धरती को अपनी धुरी पर टिका कर रखती है। अन्य ग्रहो पर जीवन नहीं है इसलिए यह प्रमाणित हो जाता है कि जीवन को को पनपने के लिए, कोई भी पिंड को ऊर्जा स्रोत वाले तारे से नियत दूरी पर मौजूद होना। आपको यह ज्ञात हो कि सूर्य के करीब के ग्रह ज्यादा गर्म और सूर्य से दूर के ग्रह ज्यादा ठंडे होते हैं, सूर्य से दूरी, सूर्य की परिक्रमा, धरती की घुर्णन, आदि भी सूर्य ऊर्जा के ही कारण होती है यह हम मान सकते हैं, 2)- वायु -  वायु जीवन का दुसरा सबसे बड़ा कारण है कि पृथ्वी पर जीवन सम्भव है, वायु धरती के हर खाली स्थान को भर देता है, साथ ही अपने अंदर से किसी भी चीज़ को गमन होने देता है, कल्पना कीजिए अगर हवा कोई ठोस वस्तु होती तो क्या यह आपके काम आ सकती थीं? क्या हम अ...

Unusual state of Kundalini meditation

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 कुण्डलिनी ध्यान की अपूर्व स्थिति Unusual state of Kundalini meditation जब हम ध्यान की मुद्रा में सीधे बैठ जाते हैं ,तब हमारी रीढ़ सीधी और संतुलित हो जाती है।पूरे शरीर का भार  संतुलित हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे कि एक पेड़ जंगल के शांत वातावरण में अपने आपको सीधा खड़ा रख पाता है, यहां तक कि वह पेड़ इतना संतुलित होता है कि बिना जड़ों की सहायता लिए बिना भी वह सीधा टिकाए रखने में कोई परेशानी नहीं है। जब तक कि उसे बाहरी बल द्वारा उसकी संतुलन को बिगाड़ा ना जाए।       जब हम उस पेड़ की तरह अपने रीढ़ को सीधा और संतुलित करने में सफल हो जाते हैं, तब हमारे शरीर का भार हमें शून्य प्रतीत होने लगता है, और हमारी सरिरिक ऊर्जा जो कोशिकाओं में बिखरी हुई थी वह सिमट कर हमारे चक्रों पर एकत्रित होने लगते हैं, इस तरह हमारे कुंडली जागरण का मार्ग प्रशस्त होने लगता है, अब आप अपनी कुण्डलिनी ऊर्जा को महसूस कर, उसकी संरचना को समझ कर उसे जागृत कर सकते हैं। ऐसा शास्त्रों की भाषा में कहा गया है किन्तु मै इस क्रिया को कुंडली जागरण नहीं समझता, या यह कुंडली जागरण के लिए उचित सब्द नहीं लगता, हमें य...

Your child's performance is slow, what to do

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आप के बच्चे की activities slow है तो क्या करें Your child's performance is slow, what to do जब आपका लाडला या लाडली की activities slow है सही वक़्त पर काम पूरा नहीं कर पाता है या पाती है तो आपका ज्ञान देना उसके कोई काम की नहीं है, बच्चे ज्ञान से ज्यादा अनुभव से सीखते हैं, ज्ञान बेशक उन्हें मार्गदर्शन देने में सहायक है, पर यह हर activities पर लागू हो ऐसा जरूरी नहीं है, समझना और करना दोनों अलग अलग प्रक्रिया है,  मीठा और फैटी खाना खाने से बॉडी का वजन बढ़ता है यह पता होने से आपके वजन मे कोई अन्तर नहीं आता जबकि मीठा और फैटी ना खाने से वजन कम होने लगता है और खाने से वजन बढ़ने लगता है।  उसी तरह एक्सरसाइज पर भी यही तरीका काम करता है,              एक्सरसाइज से हमे अनेक फायदे हैं इस पर आगे बढ़ने से पहले हम आप को, बच्चे की activities slow होने के नुकसान के बारे में बताते चलूँ, बच्चे के दिमाग पर इसका कोई खास असर नहीं होगा क्योंकि बच्चा मानसिक रूप से सुदृढ और एकाग्र चित होगा, चीजों को परखने और चीजों को करने की उसका एक अलग ही तरीका होगा, दिमाग काफी व्यवस्थि...

How to succeed सफलता कैसे मिले

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 सफलता कैसे मिले  How to succeed एक सन्यासी जो अपनी सारी उम्र गहरी अध्यात्म की खोज की, अद्भुत ज्ञान दिए, जब ओ अंतिम सांसें गिन रहे थे, उनका एक शिष्य सेवक लाल ने उनसे आखिरी बार एक सवाल किया और पूछा जाते जाते यह बता दीजिए की आपके गुरु कौन थे,   स न्यासी बोले यह मत पूछो की मेरे गुरु कौन थे, क्यूंकि अब मेरे पास सांसें कम हैं जबाब बहुत लंबा हो जाएगा और तुम समझ ना सकोगे,  सेवक राम बोला गुरुजी छोटे शब्दों मे कुछ तो बता कर जाइए, जानना चाहता है तो सुनो इससे कम शब्दों में ना कह सकूँगा, मै नदी किनारे बैठ कर नदी के शांति से बहती धाराओं को देख रहा था, अपने उलझने सुलझाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, तभी एक प्यासा कुत्ता किनारे पर आ खडा हुआ, वह गर्मी से बेहाल था, और हांफ रहा था, उसे जोरों की प्यास लगी ,  वह बढ़कर नदी की तरह सर झुकाया और डर कर एक कदम पीछे आ गया और जोर से भौका, पानी पर बनी उसकी परछाई ने भी भौकने की उसी की आवाज सुनाई दी, अब कुत्ते को क्या पता मैं कैसा दिखता हूं, सच मे दूसरा कुत्ता है या मेरी परछाईं है, वह उसे डराने की कोशिश की, प्रतिक्रिया भी वैसा ही मिला, उसने...

Destroying history of Shriram temple

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श्रीराम मंदिर का विध्वंसक इतिहास Destroying history of Shriram temple  अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल का सफाया कर देंगे,ठीक उसी तरह जैसे राणा संग्राम सिंह के मात्र 30 हजार सैनिकों ने बाबर के 1 लाख सैनिकों को गाजर-मूली की तरह काट डाला था। इसलिए भारत को जीतने का एक मात्र रास्ता यही है कि हिन्दू समाज और हिन्दुत्व के चेतना-स्थल राम मंदिर के स्थान पर मस्जिद खड़ी कर दी जाए। यह बाबरी मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध हो जाएगी और यही हिन्दुस्थान पर बाबर की विजय का स्तम्भ होगी। दोनों मुसलमान फकीरों ने बाबर को समझाया कि हिन्दुओं के मंदिरों, धर्मग्रंथों, गौशालाओं, पुस्तकालयों, शिक्षा के केन्द्रों और इसी प्रकार के हजारों मानबिंदुओं को समाप्त किए बिना भारत में मुसलमानों का वर्चस्व स्थापित करना असंभव है। यही संस्कृति-केन्द्र वास्तव में हिन्दू समाज के प्रेरणा स्रोत हैं। इन्हीं ...

How to understand enlightenment आत्मज्ञान को कैसे समझें

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आत्मज्ञान को कैसे समझें  How to understand enlightenment आत्मज्ञान होना चूजे के अंडे के बाहर आने जैसा है, हम उस तरह दुनियाँ को देख सकते हैं जैसा वह है, मजे की बात यह है कि हमे फिर कुछ भी कर पाना असंभव नहीं रह जाता, जैसे कि हम अपने जीवन में कर सकते हैं, आप उठ सकते हैं, आप भावनाएँ व्यक्त कर सकते हैं, आप दुःखी हों तो आप रो सकते हैं, प्रसन्न हों तो आप नाच सकते हैं, आप या हम इसे एक जीवन के रूप में देखते हैं।      अंडे में रहकर चूजा यह महसूस कर सकता है कि इस खोल के बाहर कुछ हो रहा है, क्यूकी बाहरी हलचल से अंडे का खोल कम्पित होगा तो चूजा उत्पन्न हो रही तरंगों से इतना अनुभव कर सकता है, तो क्या हम ऐसे ही चूजे हैं जो अंडे तोड़कर बाहर आ गए हैं, अखिर माँ का कोख भी बच्चे के लिए अंडे के अंदर ही रहने जैसा है, बच्चा सुन सकता है, महसूस कर सकता है, कम से कम जितना वह विकसित हो चुका है। तो सवाल यह है कि क्या हम आत्मज्ञान में हैं, अवश्य हम आत्मज्ञान मे हैं बशर्ते कि आप जागरूक हों कि आप कौन हैं और आपके जीवन का मकसद क्या है, क्यूकी इंसान के पास ऐसा विकसित दिमाग है कि वह, इतना कु...

तीन भावना जिसके अंदर है, वह बादशाह है । भरोसा, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा

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      तीन भावना जिसके अंदर है       वह बादशाह है     भरोसा, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा   Three spirit inside      He is king    Trust, confidence and honesty भरोसा - :-  भरोसा नहीं तो कुछ भी नहीं, भरोसा प्रकृति का आधार है, भरोसा नहीं तो कुछ भी नहीं, " भरोसा के दो आयाम होते हैं, एक आपके अंदर की ओर दूसरी आपके बाहर की ओर, जो आपके अंदर जाती है ओ आपका behaviour बनकर बाहर आती है,और जो आयाम बाहर की ओर जाती है ओ परिवेश की behaviour बनकर आपके अंदर आती है। " जिसके अनुसार आप अपनी जीवन-शैली तय करते हैं, जीवन शैली तय करती है तो स्वाभाविक है आप उसी के अनुरूप कुछ खोते जा रहे होते हैं और कुछ पाते जा रहे होते हैं। अगर आपके अंदर भरोसा शून्य है तो आपके अंदर बहुत से संबंधित भावनाओं पर इसका नकारात्मक असर होता है, भावनाओं का आधार क्षीण होने के कारण उनमे संकुचन होने लगता है, जीवन ऊर्जा का अभाव होने लगता है। इसके विपरित अगर अधिक भरोसा है तो, जीवन कार्यशैली अलग होगी पर परिणाम लगभग समान और दुखदाई होंगे। तो भ...

मानसिक अवस्थाएं Mentally situations

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Mentally situations ऐसा सोच जो मस्तिष्क की क्षमता को नष्ट कर दे         ऐसा क्या है जो इंसान को बदल देता है, यहां समझने वाली बात यह है कि, एक मस्तिष्क जो हमारे बॉडी को कन्ट्रोल करता है और वही मस्तिष्क हमारे मस्तिष्क को भी कंट्रोल करने का काम करता है,चूंकि लेख का शीर्षक मस्तिष्क और उसके सोच पर है तो हमे पहले मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को कम शब्दों में समझने की जरूरत पहले होगी।          हमारे शरीर मे हो रहे रासायनिक प्रक्रिया को तो मस्तिष्क सीधे तौर पर ही निर्देशित करता है परन्तु मस्तिष्क को जब कंट्रोल करना होता है तो यह कई चरणों मे काम करता है,इस प्रक्रिया मे माइंड अपने ज्ञानेन्द्रियों की सहायता लेता है। नाक की सहायता सूंघने के लिए, नेत्र की सहायता देखने के लिए, जीभ की सहायता टेस्ट के लिए, त्वचा की सहायता गर्मी, ठंडी के साथ वस्तु की भौतिक प्रकृति के लिए, अब हम विज्ञान की सहायता भी लेने लगे हैं, जहाँ हमारे प्रयोग से हमे और भी गहन अध्ययन का पता चलता है,  मस्तिष्क अब करता यह है  कि सारे इन्द्रियों से लिए गए आंकड़ों के आधार प...

पुनरावृत्ति का सिद्धांत Theory of Recurrence

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पुनरावृत्ति का सिद्धांत  Theory of Recurrence दोस्तों क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड के हर पिंड पुनरावृति कर रहे हैं, तब आप यह भी मान सकते हैं कि पुनरावृति में जो उस माध्यम से जो ऊर्जा प्रगट हुई है, वह या तो पूर्व से अंत तक एक समान होगी या पूर्व से मध्य या अंत तक यह ऊर्जा कई बार स्पंदित हुई होगी।                लेकिन इससे पहले हम यह जानने की कोशिश करते हैं, कि हमारे दैनिक जीवन में कौन-कौन सी चीजें हैं  जो पुनरावृति कर रही हैं, और कौन-कौन सी चीजें स्थिर हैं, या जिनकी चाल एक सीधी रेखा पर है।        पुनरावृति का यह अर्थ लगाया जाता है कि, जब कोई ऑब्जेक्ट प्रारंभिक स्थान से चलकर पुनः एक निश्चित समय में उसी बिंदु से आकर मिलता है, अर्थात उस ऑब्जेक्ट की एक पुनरावृति कहलाती है।     धड़कन की एक छोटी पुनरावृति, श्वसन की एक पुनरावृति, घड़ी की एक पुनरावृति, धरती की एक पुनरावृति, चांद की एक पुनरावृति, ध्वनि की एक पुनरावृति, प्रकाश की पुनरावृति आदि, अब हम यह मान सकते हैं कि, हर ग्रह नक्षत्र जो हमें आकाश में दिखाई...

अनहोनी कुछ भी नहीं nothing happens without reason

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अनहोनी कुछ भी नहीं   nothing happens without reason मित्रों होनी और इसका ऑपोजिट वर्ड अनहोनी के बारे में आप भली प्रकार परिचित होंगे और आपके पास हो रही घटनाओं में आप इन शब्दों का उपयोग करते ही होंगे आप योगी मानते होंगे कि आपके साथ भी कोई ऐसी ही घटना जरूर हुई होगी या आपके किसी मित्र या पड़ोसी के साथ भी ऐसी घटना का जिक्र आया होगा बाइक चलाते हुए हुआ एक्सीडेंट  क्या अनहोनी है यह कोई अनहोनी नहीं बल्कि होनी है, जो भी इस संसार में वर्तमान में हो रही है वह 100% होनी है अनहोनी नहीं। आज तक इस संसार में कुछ भी अनहोनी नहीं हुई यह प्रकृति का नियम है कि किसी भी परिणाम के पीछे कोई ना कोई कारण अवश्य ही होती है हम इसे नकार नहीं सकते हम यह भी कहते हैं कि होनी को कौन टाल सकता है अर्थात जो इस संसार में हो रहा है उसे टाला नहीं जा सकता तो यह अनहोनी जैसी शब्द कहां से आई बेशक यह शब्द वहां से बनती है जहां अज्ञानता है, जब हमें यह नहीं पता होता कि यह कैसे हुआ तो हम यह मान लेते हैं कि ऐसा होना ही नहीं चाहिए था फिर भी हो गया अथार्त होनी नहीं अनहोनी है। अनहोनी नाम की कोई शब्द नहीं होती उन्होंने उन लोगो...

Power of six sense छठी इंद्रिय की क्षमता

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Power of six sense छठी इंद्रिय की क्षमता इस ब्रह्मांड की हर चीज गति कर रही है, परम सत्य है और इस संसार की हर वस्तु गतिमान है, जिसे हम स्थिर मान रहे होते हैं जैसे घर पहाड़ खंभा आवर पेड़-पौधे इत्यादि इत्यादि सब गतिमान हैं भले ही हमे यह स्थिर महसूस  होता है।         धरती घूम रही है उसी के साथ सभी जीव जंतु नदी पहाड़ घर सभी गति कर रहे हैं, यह एक भौतिक प्रक्रिया की गति है हमारे अंदर या किसी भी वस्तु जीव या निर्जीव सबके अंदर अणु गति कर रहे हैं।           जीव या निर्जीव एक दूसरे के ऊपर अपनी क्षमता के अनुरूप हर वस्तु जीव या निर्जीव पर अपना प्रभाव दिखाते हैं जब हम अकेले किसी कमरे में बैठे होते हैं तो घर में रखे सामान की मैग्नेटिक फील्ड और हमारी मैग्नेटिक फील्ड या घर की मैग्नेटिक फील्ड और हमारी मैग्नेटिक फील्ड आपस में जुड़े रहते हैं, इसका हमें इसका ज्ञान नहीं होता, हम इस पर कभी ध्यान नहीं देते वह निरंतर चल रहा होता है, ओ हमारे ऊपर पॉजिटिव या नेगेटिव प्रभाव डाल रहे होते हैं, इसे जानने के लिए आपको थोड़ा ज्यादा संवेदनशील होना होगा आप जितना ज्...

निधिवन - जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास

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निधिवन - जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास 5200 वर्ष पूर्व वृन्दावन की इसी धरा पर कान्हा जी ने राधारानी और गोपियों संग महारास रचाया था... द्वापर युग से आज तक हर रात राधे-कृष्ण यहां साक्षात प्रकट होते है... निधिवन में स्थित 16108 वृक्ष गोपियों मेंतब्दील होकर रातभर कान्हा संग महारास रचाती है... सूरज की पहली किरण फूटने से पहले ही गोपियां वृक्ष का आकार ले लेती है.. और भगवान कृष्ण राधिका रानी के संग अन्तर्धान हो जाते है। एक बार कलकत्ता का एक भक्त अपने गुरु की सुनाई हुई भागवत कथा से इतना मोहित हुआ कि वह हरसमय वृन्दावन आने की सोचने लगा उसके गुरु उसे निधिवन के बारे में बताया करते थे और कहते थे कि आज भी भगवान यहाँ रात्रि को रास रचाने आते है उस भक्त को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था और एक बार उसने निश्चय किया कि वृन्दावन जाऊंगा और ऐसा ही हुआ श्री राधा रानी की कृपा हुई और आ गया वृन्दावन उसने जी भर कर बिहारी जीका राधा रानी का दर्शन किया लेकिन अब भी उसे इसबात का यकीन नहीं था कि निधिवन में रात्रि को भगवान रास रचाते है उसने सोचा कि एक दिन निधिवन रुक कर देखता हू इसलिए वो वही पर रूक गयाऔर देर तक...