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How to succeed सफलता कैसे मिले

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 सफलता कैसे मिले  How to succeed एक सन्यासी जो अपनी सारी उम्र गहरी अध्यात्म की खोज की, अद्भुत ज्ञान दिए, जब ओ अंतिम सांसें गिन रहे थे, उनका एक शिष्य सेवक लाल ने उनसे आखिरी बार एक सवाल किया और पूछा जाते जाते यह बता दीजिए की आपके गुरु कौन थे,   स न्यासी बोले यह मत पूछो की मेरे गुरु कौन थे, क्यूंकि अब मेरे पास सांसें कम हैं जबाब बहुत लंबा हो जाएगा और तुम समझ ना सकोगे,  सेवक राम बोला गुरुजी छोटे शब्दों मे कुछ तो बता कर जाइए, जानना चाहता है तो सुनो इससे कम शब्दों में ना कह सकूँगा, मै नदी किनारे बैठ कर नदी के शांति से बहती धाराओं को देख रहा था, अपने उलझने सुलझाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, तभी एक प्यासा कुत्ता किनारे पर आ खडा हुआ, वह गर्मी से बेहाल था, और हांफ रहा था, उसे जोरों की प्यास लगी ,  वह बढ़कर नदी की तरह सर झुकाया और डर कर एक कदम पीछे आ गया और जोर से भौका, पानी पर बनी उसकी परछाई ने भी भौकने की उसी की आवाज सुनाई दी, अब कुत्ते को क्या पता मैं कैसा दिखता हूं, सच मे दूसरा कुत्ता है या मेरी परछाईं है, वह उसे डराने की कोशिश की, प्रतिक्रिया भी वैसा ही मिला, उसने...

पुनरावृत्ति का सिद्धांत Theory of Recurrence

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पुनरावृत्ति का सिद्धांत  Theory of Recurrence दोस्तों क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड के हर पिंड पुनरावृति कर रहे हैं, तब आप यह भी मान सकते हैं कि पुनरावृति में जो उस माध्यम से जो ऊर्जा प्रगट हुई है, वह या तो पूर्व से अंत तक एक समान होगी या पूर्व से मध्य या अंत तक यह ऊर्जा कई बार स्पंदित हुई होगी।                लेकिन इससे पहले हम यह जानने की कोशिश करते हैं, कि हमारे दैनिक जीवन में कौन-कौन सी चीजें हैं  जो पुनरावृति कर रही हैं, और कौन-कौन सी चीजें स्थिर हैं, या जिनकी चाल एक सीधी रेखा पर है।        पुनरावृति का यह अर्थ लगाया जाता है कि, जब कोई ऑब्जेक्ट प्रारंभिक स्थान से चलकर पुनः एक निश्चित समय में उसी बिंदु से आकर मिलता है, अर्थात उस ऑब्जेक्ट की एक पुनरावृति कहलाती है।     धड़कन की एक छोटी पुनरावृति, श्वसन की एक पुनरावृति, घड़ी की एक पुनरावृति, धरती की एक पुनरावृति, चांद की एक पुनरावृति, ध्वनि की एक पुनरावृति, प्रकाश की पुनरावृति आदि, अब हम यह मान सकते हैं कि, हर ग्रह नक्षत्र जो हमें आकाश में दिखाई...

कुछ बनना है तो इंसान बन

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कुछ बनना है तो इंसान बन न हिन्दू बन ना मुसलमान बन बन सको तो इंसानबन इंसानियत को तू मत भूल पगले पैदा हुए थे तो क्या थे बदले कहां है तू खोया, नींद से आज जगले कुछ बनना है तो इंसान बन न अग्नि बन न तूफान बन इंसानियत की पहचान बन  क्या है तेरे पास जो दे सकेगा  क्या ना ले पाओ जो ओ दे सकेगा क्यू लड़ते हो नाम पे उसके उस आ तमा का भी दिल दुखेगा कुछ बनना है तो इंसान बन ना गीता बन ना कुरान बन सीधा साधा इंसान बन उसकी नजर में सब जीव जन्तु हमने ही लगाए हैं किन्तु परन्तु न पानी है तेरी न हवा है तेरा  न साम है तेरी न तेरा सवेरा किस चक्कर में हो तुम यारो ना जीत तेरी ना हार तेरा कुछ बनना है तो इंसान बन ना हैवान बन ना सैतान बन ना कोई भगवान बन देशों में बांटा धर्मो में  बांटा ऊंच नीच के कर्मो में बांटा देखा करो कभी  सोंच कर तुम अभी तक हुआ  है किसका घाटा कुछ बनना है तो इंसान बन न हिंदू बन ना मुसलमान बन बन सको तो इंसान बन Prakash Patel