लहरों की औकात
बेशक तुम लहर हो, बारिश की बूंदों की, हम तो हैं लहर आंधी और तूफान की, लहर के उपर लहर तुम्हारी, छोटी सी है शहर तुम्हारी, तुम जैसों से ,तुम टकरा कर, मिट जाना है मुस्करा कर, तुम जैसे ही ,बहुतों की कहानी है वही, संतुष्ट हो, पूर्ण हो माना की सबसे कही, तुम जी लेते हो उफ़ ना करते, मिट जाते पर, उफ ना करते, हम वह लहर हैं, जो टकरा कर नहीं जन्मा, चोट खाकर नहीं जन्मा, था शांत समंदर का सन्नाटा भारी, तभी,भार हवाओं पे,कोई दे दी भारी, तब से ,चला हूँ मै, नहीं मेरा ,कोई बाधा, तुम पुरा गोल- मोल , मै बस,थोड़ा आधा, तुम्हारा पल भर का, आना जाना है, इस लहर का सफर , सदियों पुराना है, बेशक तुम लहर हो बारिश के बूंदों की..... हम तो हैं लहर आंधी और तूफान की। बेशक तुम्हे लगता होगा , हम हैं महान, खोल रखी तुमने भी मोहब्बत की दुकान, भर रखी होगी तूने, कस कस कर फुटकर समान, समझ बैठा है तूने, मै बनिया बड़ा महान, हम लहरों पे डाल प्रेम का, सुंदर सुंदर तोफा, हम सदिओं...