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माया का संसार

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माया का संसार माया का संसार तुम्हारा माया का संसार,  एक तरफ लगे  पासा दूजे तरफ तेज धार।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। १ **" जैसे उपजी काया से काया वैसे आई माया,  दूर का वासी भाई लगे, अपना भाई पराया,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। २ *** दूर बैठा वह देख रहा, तुम्हारी करतूतों को,  उसकी तरफ पीठ करके पूज रहे हो भूतों को,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ३ *** भूत तुम्हारे साथ खड़े हैं, आज अभी और कल,  तूने प्रभुनाम से बांध रखा, क्या मेरा रूप-विशाल।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ४ *** आँख खोल के देख जगत मे, मेरा क्या परमान,  आँख बंद कर देख पायेगा, जब करेगा मेरा ध्यान।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ५ *** जो सताता, जो सताया जाता, मेरा सबसे नाता,  मै ही कर्म,मै कर्ता - कारण, मै ही दण्ड, सुखदाता।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ६ *** तेरे सुख के लाखों उपाय, एक भी पाए तु तर जाय,  और किसी को जग ना भाये, देख पिछे,हमी को पाए।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ७ *** ऐसा बनाया...

स्वर शिव

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 आओ हम स्वर बन जाए,  कोई राग रंग रचाए,  यहाँ सब कुछ है, लय की एक धारा,  स्वर से चलता, है जग सारा,  एक समय मे ,हम एक ही सास लेते,  या अंदर आते, या बाहर जाते,  यही तो लय है, यही है  संगीत,  बहे जाओ स्वर मे,स्वर का बनके मीत,  जो हमेशा मेरे सांसो से आता जाता,  वही मुरली वाला वही है विधाता,  नापो,कभी अपने सांसों की, गहराई,  पा लोगे अपनी प्रभुताई,  जिसे हमन खोजा, सदा दर के बाहर,  वह आराम से  बसा हुआ मेरे अंदर,  या यह कहें की वही देखते है,  यह भ्रम है हमारा की हम देखते हैं,  अंतरात्मा की परछाई मिटाना पड़ेगा,  फिर शिव मे एक हो जाना पड़ेगा,  शिव,नाम ही है एक होने का,  ज्योति स्वरूप दो कोने का,  वही दो हैं सांसें, एक आती एक जाती,  कहीं भी रखो स्थिर अपनी छाती, ब्रम्हांड की नाद मे, होकर सवार,  खोलो अपनी स्वर के द्वार,  स्वर को मिलाना, मानो शिव हो जाना,  धुन मधुर बंशी की बन जाना,  आओ हम स्वर बन जाएं,  कोई राग रंग रचाए। 

लहरों की औकात

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  बेशक तुम लहर हो, बारिश की बूंदों की,  हम तो हैं लहर आंधी और तूफान की,  लहर के उपर लहर तुम्हारी,  छोटी सी है शहर तुम्हारी,  तुम जैसों से ,तुम टकरा कर,  मिट जाना है मुस्करा कर,  तुम जैसे ही ,बहुतों की कहानी है वही,  संतुष्ट हो, पूर्ण हो माना की सबसे कही,  तुम जी लेते हो उफ़ ना करते,  मिट जाते पर, उफ ना करते,  हम वह लहर हैं,  जो टकरा कर नहीं जन्मा,  चोट खाकर नहीं जन्मा,  था शांत समंदर का सन्नाटा भारी,  तभी,भार हवाओं पे,कोई दे दी भारी,  तब से ,चला हूँ मै, नहीं मेरा ,कोई बाधा,  तुम पुरा गोल- मोल , मै बस,थोड़ा आधा,  तुम्हारा पल भर का, आना जाना है,  इस लहर का सफर , सदियों पुराना है,  बेशक तुम लहर हो बारिश के बूंदों की.....  हम तो हैं लहर आंधी और तूफान की।  बेशक तुम्हे लगता होगा , हम हैं महान,  खोल रखी तुमने भी मोहब्बत की दुकान,  भर रखी होगी तूने, कस कस कर फुटकर समान,  समझ बैठा है तूने, मै बनिया बड़ा महान,   हम लहरों पे डाल प्रेम का, सुंदर सुंदर तोफा,  हम सदिओं...

देश की दिशा बदलने वाली है

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   देश की दिशा बदलने वाली है   — एक समग्र दृष्टिकोण से भारत का बदलता भविष्य भारत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जानिए धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक बदलावों के जरिए कैसे देश की दिशा बदल रही है। यह लेख भारत के भविष्य की गहराई से पड़ताल करता है। प्रस्तावना: क्या देश सच में बदल रहा है? भारत, जो सदियों से विविधताओं, संघर्षों और संस्कृतियों का संगम रहा है, आज नए युग की दहलीज पर खड़ा है। धार्मिक जागरण, सामाजिक सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राजनैतिक चेतना — ये चार स्तंभ आज देश की दिशा तय कर रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि क्या देश बदलेगा, सवाल है कि हम उसे किस दिशा में बदलना चाहते हैं। क्या हमारी दिशा जन कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ रही है, या किसी स्वार्थ, स्वहित के साथ दूसरों की हानि के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।  हम चर्चा करेंगे उसकी जो हो सकती है या होने की दिशा मे है, हम उसकी बात नहीं करते जो किया जा सकता था। क्योकि जो समय की धारा बदल जाए ऐसी छमता एक दिन मे नही आती, बल्कि यह छमता धीरे-धीरे बलवान होती है और गति करती है।   धार्मिक चेतना का पु...

साली आधी घरवाली

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साली आधी घरवाली: रिश्तों की मिठास में लिपटी एक मज़ाकिया कहावत परिचय: जब शब्द बन जाएँ मुस्कान का कारण Jija sali ki nok jhok भारतीय समाज में रिश्तों की बुनावट जितनी गहराई लिए होती है, उतनी ही रंगीन और रोचक भी होती है। हमारे यहाँ हर रिश्ता एक कहानी कहता है—कभी भावुक, कभी मज़ाकिया और कभी-कभी तो व्यंग्य से भरपूर। इन्हीं रिश्तों में एक है जीजा-साली का रिश्ता, जिसमें अपनापन, छेड़छाड़, हँसी-ठिठोली और समाज की सांस्कृतिक खुशबू शामिल है। इसी रिश्ते को केंद्र में रखकर बनी है एक लोकप्रिय कहावत— "साली आधी घरवाली" । सुनने में मज़ाकिया, लेकिन गहराई में जाकर देखें तो यह कहावत भारतीय रिश्तों की परंपरा, फिल्मी प्रभाव, सामाजिक ढांचे और पितृसत्तात्मक सोच का मज़ेदार मिश्रण है। आइए, इस लेख में गहराई से समझते हैं कि यह कहावत कहां से आई, क्यों प्रसिद्ध हुई, इसके सामाजिक पहलू क्या हैं, और आज के युग में इसकी प्रासंगिकता कितनी है। साली-जीजा का रिश्ता: भारतीय संस्कृति की एक अनोखी कड़ी भारतीय पारिवारिक ढांचे में साली (पत्नी की बहन) और जीजा (उसका पति) का रिश्ता एक ऐसा सामाजिक रिश्ता है जो खून का...

प्रकृति के नियम

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 Law of nature  हमे धरती पर जिवित रहने के लिए प्रकृति के नियम को जानना बहुत जरूरी है, प्रकृति किसी के लिए भी अपने नियम नहीं बदलता, कोई फर्क़ नहीं पड़ता कि आप क्या सोचते हैं और आप क्या करते हैं, कोई इंसान हो या कोई जानवर हो जीव हो या निर्जीव हो ईश्वर ने सबके लिए नियम बना रखे हैं सबको उनके बनाए गए नियम के अनुसार ही चलना होता है, जिसने भी उस परम नियम के विरुद्ध चलने का प्रयास किया उसका मिटना तय है,      जब तेज आँधी आती है तब सारे पौधे हवा की बहाव की दिशा में झुक जाते हैं, हालाँकि यह हवा के दबाव के कारण होता है परंतु यदि कोई पेड़ ना झुक पाए उसकी शाखाओं मे लचीला रुख नहीं अपनाया तो क्या होगा? निश्चित रूप से उस पेड़ की शाखाएँ टूट कर जमीन पर गिर जाएंगी।       धरती पर कई प्राकृतिक विराट महाशक्तियों के सामने मनुष्य की कोई औकात नहीं है, हम एक पल भी उसके सामने नहीं टिक पाएंगे। इसलिये हमे यह जान लेना चाहिए कि हमसे भी शक्तिशाली और भी कोई है, हम तो एक तिनके के समान हवा मे उड़ सकते हैं,      जल जिस तरह जीवन के लिए वरदान है ठीक उसी तरह जानलेवा भी है...

Four piller of life

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 Life stay On four piller जीवन के चार स्तम्भ जीवन हमेशा से किसी एक आधार पर नहीं टिकी, जीवन के चार पिलर पर टिकी हुई है, अगर इनमे से कोई भी खंबा गिरा तो जीवन रूपी मकान धराशाई हो जाएगा।  1)- सूर्य - सूर्य हमारे जिवित होने का सबसे पहला स्तम्भ कहा जा सकता है, जिसने अपने ताप ऊर्जा के निश्चित दूरी पर धरती को स्थान दिया साथ ही अपनी गुरुत्व से धरती को अपनी धुरी पर टिका कर रखती है। अन्य ग्रहो पर जीवन नहीं है इसलिए यह प्रमाणित हो जाता है कि जीवन को को पनपने के लिए, कोई भी पिंड को ऊर्जा स्रोत वाले तारे से नियत दूरी पर मौजूद होना। आपको यह ज्ञात हो कि सूर्य के करीब के ग्रह ज्यादा गर्म और सूर्य से दूर के ग्रह ज्यादा ठंडे होते हैं, सूर्य से दूरी, सूर्य की परिक्रमा, धरती की घुर्णन, आदि भी सूर्य ऊर्जा के ही कारण होती है यह हम मान सकते हैं, 2)- वायु -  वायु जीवन का दुसरा सबसे बड़ा कारण है कि पृथ्वी पर जीवन सम्भव है, वायु धरती के हर खाली स्थान को भर देता है, साथ ही अपने अंदर से किसी भी चीज़ को गमन होने देता है, कल्पना कीजिए अगर हवा कोई ठोस वस्तु होती तो क्या यह आपके काम आ सकती थीं? क्या हम अ...

Natural Compound and our life

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  Natural compound used in our daily life प्राकृतिक यौगिक का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किया जाना जरूरी क्यों है?  जिसे हम रोज दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, उसमे दो प्रकार के चीज़ शामिल होते हैं 1)-प्राकृतिक 2)-रासायनिक प्राकृतिक वह होता है, जो हमारे आस-पास शुद्ध रूप में पाया जाता है, या जिसे हम प्रकृति से सीधे प्राप्त करते हैं, जैसे ताजी हवा, ताजा पानी, फल-सब्जी, अनाज, आयुर्वेदिक औषधि आदि।        हमारा शरीर प्राकृतिक है और हर वह घटक जो प्रकृति मे शुद्ध रूप में मौजूद है वह हमारे शरीर तथा स्वास्थ्य के लिए उत्तम है, आजकल फल और सब्जियों में रसायन का प्रयोग किया जाता है जिससे फल या सब्जियों के प्राकृतिक तत्वों में आंशिक बदलाव हो जाता है और यह प्राकृतिक रूप से अशुद्ध हो जाती है। फलों और सब्जियों के स्वाद मे कमी और गुणवत्ता में कमी आ जाती है जिसके कारण हमारे शरीर मे या तो वह बुरा प्रभाव पड़ता है या पोषक तत्व कम होने से उसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है।        उत्पादन को बढ़ाने के लिए आजकल कुछ भी किया जा रहा है, यह सभी को पता है।     ...

पहला कदम Frist step

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पहला कदम Frist step  पहला कदम का अर्थ ही है , चल देना, सुरु करना, कदम बढ़ाना, निकल जाना, अपनी मंजिल की ओर अपने लक्ष की दिशा में आगे बढ़ना ही पहला कदम का शाब्दिक अर्थ है।      जीवन को परिवर्तित करने मे इसी पहले कदम का महत्वपूर्ण योगदान है, इससे दो बाते होती हैं या तो आप आप अपनी सम्भावनाओं को एक नई दिशा देकर अपने सपनों की ऊंची उड़ान लगाते हुए अपनी सफलता की सीढ़ी बनाते हुए, अपने मंजिल की ओर बढ़ते हैं।या आप हार मानकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं।           पहला कदम ज्यादातर आसान नहीं होता, आसान इस लिए भी नहीं होता क्योंकि पहले कदम के साथ एक अनजाना डर होता है, जो इंसान को मुसीबत मे डालने का झूठा प्रतिबिंब दिखाता है, और मन मे कई तरह के सवाल उठने लगता है, मै गिर गया तो, नहीं चल पाया तो, असफल हो गया तो, धन डूब गया तो, लोग क्या कहेंगे, लोग क्या सोचेंगे आदि अनेक मानसिक भ्रांतियां उत्पन्न होने लगती है।  यह डर एक नजर से स्वाभाविक भी है, भले ही यह निराधार हो, अनजाने मे उठाया गया कदम, गलत दिशा में उठाया गया कदम, बिना जानकारी के उठाया गया कदम, बिना...

Unusual state of Kundalini meditation

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 कुण्डलिनी ध्यान की अपूर्व स्थिति Unusual state of Kundalini meditation जब हम ध्यान की मुद्रा में सीधे बैठ जाते हैं ,तब हमारी रीढ़ सीधी और संतुलित हो जाती है।पूरे शरीर का भार  संतुलित हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे कि एक पेड़ जंगल के शांत वातावरण में अपने आपको सीधा खड़ा रख पाता है, यहां तक कि वह पेड़ इतना संतुलित होता है कि बिना जड़ों की सहायता लिए बिना भी वह सीधा टिकाए रखने में कोई परेशानी नहीं है। जब तक कि उसे बाहरी बल द्वारा उसकी संतुलन को बिगाड़ा ना जाए।       जब हम उस पेड़ की तरह अपने रीढ़ को सीधा और संतुलित करने में सफल हो जाते हैं, तब हमारे शरीर का भार हमें शून्य प्रतीत होने लगता है, और हमारी सरिरिक ऊर्जा जो कोशिकाओं में बिखरी हुई थी वह सिमट कर हमारे चक्रों पर एकत्रित होने लगते हैं, इस तरह हमारे कुंडली जागरण का मार्ग प्रशस्त होने लगता है, अब आप अपनी कुण्डलिनी ऊर्जा को महसूस कर, उसकी संरचना को समझ कर उसे जागृत कर सकते हैं। ऐसा शास्त्रों की भाषा में कहा गया है किन्तु मै इस क्रिया को कुंडली जागरण नहीं समझता, या यह कुंडली जागरण के लिए उचित सब्द नहीं लगता, हमें य...

कामयाबी की कहानी story of success

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कामयाबी की कहानी Story of success   एक बार एक शहर में एक बेरोजगर रहता था, वैसे तो इस देश में बेरोजगरों की कोई कमी नहीं है परन्तु, हम उस बेरोजगर की बात करेंगे जो अपने काम का है, उसने बहुत कोशिश की परन्तु वह अच्छी नौकरी नहीं ढूंढ़ पाया, थक हारकर वह झिल के किनारे आकर बैठ गया, वह अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित था, वह झील के किनारे पर लोगों को मछली पकड़ते देख रहा था , उसके दिमाग में भी आइडियास का सूत्रपात होने लगा, उसने सोचा कि अगर वह मछली पकड़ कर बाजार में बेच दे तो अच्छी आय की जा सकती है जो हमारी बेरो़गारी दूर कर सकता है, और मै कीसी दिन अमीर बन सकता हूं, नौकरी तो आखिर नौकरी ही होती है , मै यहां अपने नए धंधे का मालिक भी बन सकता हूं, मुझे क़िसी कि आदेश का पालन करने की कोई जरूरत नहीं है।    लेकिन उस गरीब बेरो़गार के पास मछली पकड़ने के उपयुक्त साधन नहीं थे , ना नेट था ना नाव थी ना और कोई साधन , पर उसकी इच्छा शक्ति काफी मजबूत हो रही थी कि बस अब हमें किसी तरह इस काम को करना ही है, वह मछली फसाने का कांटा ले आया , एक लंबे डंडे से बांधकर, चारा लगाकर झिल में फेकता और मछली के फसने का ...

Your child's performance is slow, what to do

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आप के बच्चे की activities slow है तो क्या करें Your child's performance is slow, what to do जब आपका लाडला या लाडली की activities slow है सही वक़्त पर काम पूरा नहीं कर पाता है या पाती है तो आपका ज्ञान देना उसके कोई काम की नहीं है, बच्चे ज्ञान से ज्यादा अनुभव से सीखते हैं, ज्ञान बेशक उन्हें मार्गदर्शन देने में सहायक है, पर यह हर activities पर लागू हो ऐसा जरूरी नहीं है, समझना और करना दोनों अलग अलग प्रक्रिया है,  मीठा और फैटी खाना खाने से बॉडी का वजन बढ़ता है यह पता होने से आपके वजन मे कोई अन्तर नहीं आता जबकि मीठा और फैटी ना खाने से वजन कम होने लगता है और खाने से वजन बढ़ने लगता है।  उसी तरह एक्सरसाइज पर भी यही तरीका काम करता है,              एक्सरसाइज से हमे अनेक फायदे हैं इस पर आगे बढ़ने से पहले हम आप को, बच्चे की activities slow होने के नुकसान के बारे में बताते चलूँ, बच्चे के दिमाग पर इसका कोई खास असर नहीं होगा क्योंकि बच्चा मानसिक रूप से सुदृढ और एकाग्र चित होगा, चीजों को परखने और चीजों को करने की उसका एक अलग ही तरीका होगा, दिमाग काफी व्यवस्थि...

How to succeed सफलता कैसे मिले

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 सफलता कैसे मिले  How to succeed एक सन्यासी जो अपनी सारी उम्र गहरी अध्यात्म की खोज की, अद्भुत ज्ञान दिए, जब ओ अंतिम सांसें गिन रहे थे, उनका एक शिष्य सेवक लाल ने उनसे आखिरी बार एक सवाल किया और पूछा जाते जाते यह बता दीजिए की आपके गुरु कौन थे,   स न्यासी बोले यह मत पूछो की मेरे गुरु कौन थे, क्यूंकि अब मेरे पास सांसें कम हैं जबाब बहुत लंबा हो जाएगा और तुम समझ ना सकोगे,  सेवक राम बोला गुरुजी छोटे शब्दों मे कुछ तो बता कर जाइए, जानना चाहता है तो सुनो इससे कम शब्दों में ना कह सकूँगा, मै नदी किनारे बैठ कर नदी के शांति से बहती धाराओं को देख रहा था, अपने उलझने सुलझाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, तभी एक प्यासा कुत्ता किनारे पर आ खडा हुआ, वह गर्मी से बेहाल था, और हांफ रहा था, उसे जोरों की प्यास लगी ,  वह बढ़कर नदी की तरह सर झुकाया और डर कर एक कदम पीछे आ गया और जोर से भौका, पानी पर बनी उसकी परछाई ने भी भौकने की उसी की आवाज सुनाई दी, अब कुत्ते को क्या पता मैं कैसा दिखता हूं, सच मे दूसरा कुत्ता है या मेरी परछाईं है, वह उसे डराने की कोशिश की, प्रतिक्रिया भी वैसा ही मिला, उसने...

Giloy and immune system

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 गिलोय और प्रतिरक्षा प्रणाली गिलोय ऐसा औषधीय पौधा जिसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मे असाधारण वृद्धि देखने को मिलती है।  यदि आपको लगता है कि प्रतिरक्षा में वृद्धि करना असंभव है, तो ऐसा नहीं है। प्रदूषित वातावरण, अनुचित खान-पान और रहन-सहन से हमारी प्रतिरक्षा निश्चित रूप से कमजोर हो गई है। इसके बावजूद, खोई हुई प्रतिरक्षा को भी पुनः प्राप्त किया जा सकता है। प्रतिरोध क्षमता कम होने के लक्षण 1) थोड़े गिले होने या आद्र वातावरण मे जुकाम जैसा लगना तथा कुछ घंटों मे समान्य हो जाना। 2) धूल भरी जगहों पर छींक आना तथा कुछ घंटों मे समान्य हो जाना। 3) ज़ख्म का जल्दी ठीक ना होना। 4) पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाना या गरिष्ठ भोजन पचा ना पाना। 5) त्वचा के रोग बार-बार होना। 6) सिर मे रूसी होना। 7) कफ का बार-बार आना। 8) शरीर का कभी गर्म तो कभी ठंडा हो जाना। 9) भोजन मे अरुचि रहना। आदि अनेक तरह के लक्षण दिखाई देते हैं मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का वर्णन किया गया है। इनमें से सबसे प्रभावी गिलोय या अमृता को माना जाता रहा है। ...

Destroying history of Shriram temple

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श्रीराम मंदिर का विध्वंसक इतिहास Destroying history of Shriram temple  अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल का सफाया कर देंगे,ठीक उसी तरह जैसे राणा संग्राम सिंह के मात्र 30 हजार सैनिकों ने बाबर के 1 लाख सैनिकों को गाजर-मूली की तरह काट डाला था। इसलिए भारत को जीतने का एक मात्र रास्ता यही है कि हिन्दू समाज और हिन्दुत्व के चेतना-स्थल राम मंदिर के स्थान पर मस्जिद खड़ी कर दी जाए। यह बाबरी मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध हो जाएगी और यही हिन्दुस्थान पर बाबर की विजय का स्तम्भ होगी। दोनों मुसलमान फकीरों ने बाबर को समझाया कि हिन्दुओं के मंदिरों, धर्मग्रंथों, गौशालाओं, पुस्तकालयों, शिक्षा के केन्द्रों और इसी प्रकार के हजारों मानबिंदुओं को समाप्त किए बिना भारत में मुसलमानों का वर्चस्व स्थापित करना असंभव है। यही संस्कृति-केन्द्र वास्तव में हिन्दू समाज के प्रेरणा स्रोत हैं। इन्हीं ...