Four piller of life

 Life stay On four piller
जीवन के चार स्तम्भ

जीवन हमेशा से किसी एक आधार पर नहीं टिकी, जीवन के चार पिलर पर टिकी हुई है, अगर इनमे से कोई भी खंबा गिरा तो जीवन रूपी मकान धराशाई हो जाएगा। 




1)- सूर्य -

सूर्य हमारे जिवित होने का सबसे पहला स्तम्भ कहा जा सकता है, जिसने अपने ताप ऊर्जा के निश्चित दूरी पर धरती को स्थान दिया साथ ही अपनी गुरुत्व से धरती को अपनी धुरी पर टिका कर रखती है।
अन्य ग्रहो पर जीवन नहीं है इसलिए यह प्रमाणित हो जाता है कि जीवन को को पनपने के लिए, कोई भी पिंड को ऊर्जा स्रोत वाले तारे से नियत दूरी पर मौजूद होना। आपको यह ज्ञात हो कि सूर्य के करीब के ग्रह ज्यादा गर्म और सूर्य से दूर के ग्रह ज्यादा ठंडे होते हैं, सूर्य से दूरी, सूर्य की परिक्रमा, धरती की घुर्णन, आदि भी सूर्य ऊर्जा के ही कारण होती है यह हम मान सकते हैं,

2)- वायु - 

वायु जीवन का दुसरा सबसे बड़ा कारण है कि पृथ्वी पर जीवन सम्भव है, वायु धरती के हर खाली स्थान को भर देता है, साथ ही अपने अंदर से किसी भी चीज़ को गमन होने देता है, कल्पना कीजिए अगर हवा कोई ठोस वस्तु होती तो क्या यह आपके काम आ सकती थीं? क्या हम अपने जीवन ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए साँसों के माध्यम से हवा को अंदर और बाहर कर सकते नहीं, हवाओ  के बहुत सारे ऐसे काम हैं जिसने जीवन को आसान बना रखा है, हवा के बिना जीवन की कल्पना करना कठिन है।


3)- पृथ्वी -

पृथ्वी का होना ही जीवन का आधार है, हालांकि इसे पहले स्थान पर रखना चाहिए, परंतु किसी भी स्तम्भ को कोई स्थान देना उचित नहीं है, क्योंकि कोई भी तत्व अकेले जीवन देने के काबिल नहीं है, धरती हमे टीके रहने के लिए उचित आधार प्रदान करती है, साथ ही हमे जिंदा रहने के लिए भोजन भी उपलब्ध कराने मे सहायक है, मिट्टी की महिमा ऐसी है जिसे बयान करना कठिन है, मिट्टी को माता की उपमा दी गई है, जैसे आप जन्म लेकर अपनी माता की गोद मे उचित देखभाल के साथ बढ़ते है ठीक उसी तरह धरती भी हमारे लिए ऐसी ही है।

4)- जल -

जल ही जीवन है ऐसा कहा जाता रहा है आपको प्यास लगी हो बहुत जोरों की प्यास लगी हो तब आपको यह अह्सास हो जाएगा कि जल जीवन है या नहीं है, शरीर का 70% पानी ही है, जैसे पत्थर मे जान नहीं होती, सुखी लकड़ी में जान नहीं होती, उसी तरह हमारे शरीर का पानी भी खत्म हो जाए और सूर्य की ताप्ती गर्मी हमारे शरीर को सूखा दे तो हमारे शरीर की आन्तरिक क्रियाएं हो नहीं पाएँगी, क्योंकि हमारे शरीर के विभिन्न क्रियाओ को होने के लिए बॉडी मे तरलता का होना जरूरी है, आक्सीजन तथा अन्य जरूरी तत्वों का संवाहक जल ही है।

यह चारों ही धरती पर जीवन होने के आधार है, अगर इनमें से कोई एक भी नहीं रही तो जीवन सम्भव नहीं है, 

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