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Giloy and immune system

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 गिलोय और प्रतिरक्षा प्रणाली गिलोय ऐसा औषधीय पौधा जिसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मे असाधारण वृद्धि देखने को मिलती है।  यदि आपको लगता है कि प्रतिरक्षा में वृद्धि करना असंभव है, तो ऐसा नहीं है। प्रदूषित वातावरण, अनुचित खान-पान और रहन-सहन से हमारी प्रतिरक्षा निश्चित रूप से कमजोर हो गई है। इसके बावजूद, खोई हुई प्रतिरक्षा को भी पुनः प्राप्त किया जा सकता है। प्रतिरोध क्षमता कम होने के लक्षण 1) थोड़े गिले होने या आद्र वातावरण मे जुकाम जैसा लगना तथा कुछ घंटों मे समान्य हो जाना। 2) धूल भरी जगहों पर छींक आना तथा कुछ घंटों मे समान्य हो जाना। 3) ज़ख्म का जल्दी ठीक ना होना। 4) पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाना या गरिष्ठ भोजन पचा ना पाना। 5) त्वचा के रोग बार-बार होना। 6) सिर मे रूसी होना। 7) कफ का बार-बार आना। 8) शरीर का कभी गर्म तो कभी ठंडा हो जाना। 9) भोजन मे अरुचि रहना। आदि अनेक तरह के लक्षण दिखाई देते हैं मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का वर्णन किया गया है। इनमें से सबसे प्रभावी गिलोय या अमृता को माना जाता रहा है। ...

Destroying history of Shriram temple

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श्रीराम मंदिर का विध्वंसक इतिहास Destroying history of Shriram temple  अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल का सफाया कर देंगे,ठीक उसी तरह जैसे राणा संग्राम सिंह के मात्र 30 हजार सैनिकों ने बाबर के 1 लाख सैनिकों को गाजर-मूली की तरह काट डाला था। इसलिए भारत को जीतने का एक मात्र रास्ता यही है कि हिन्दू समाज और हिन्दुत्व के चेतना-स्थल राम मंदिर के स्थान पर मस्जिद खड़ी कर दी जाए। यह बाबरी मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध हो जाएगी और यही हिन्दुस्थान पर बाबर की विजय का स्तम्भ होगी। दोनों मुसलमान फकीरों ने बाबर को समझाया कि हिन्दुओं के मंदिरों, धर्मग्रंथों, गौशालाओं, पुस्तकालयों, शिक्षा के केन्द्रों और इसी प्रकार के हजारों मानबिंदुओं को समाप्त किए बिना भारत में मुसलमानों का वर्चस्व स्थापित करना असंभव है। यही संस्कृति-केन्द्र वास्तव में हिन्दू समाज के प्रेरणा स्रोत हैं। इन्हीं ...