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Natural Compound and our life

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  Natural compound used in our daily life प्राकृतिक यौगिक का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किया जाना जरूरी क्यों है?  जिसे हम रोज दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, उसमे दो प्रकार के चीज़ शामिल होते हैं 1)-प्राकृतिक 2)-रासायनिक प्राकृतिक वह होता है, जो हमारे आस-पास शुद्ध रूप में पाया जाता है, या जिसे हम प्रकृति से सीधे प्राप्त करते हैं, जैसे ताजी हवा, ताजा पानी, फल-सब्जी, अनाज, आयुर्वेदिक औषधि आदि।        हमारा शरीर प्राकृतिक है और हर वह घटक जो प्रकृति मे शुद्ध रूप में मौजूद है वह हमारे शरीर तथा स्वास्थ्य के लिए उत्तम है, आजकल फल और सब्जियों में रसायन का प्रयोग किया जाता है जिससे फल या सब्जियों के प्राकृतिक तत्वों में आंशिक बदलाव हो जाता है और यह प्राकृतिक रूप से अशुद्ध हो जाती है। फलों और सब्जियों के स्वाद मे कमी और गुणवत्ता में कमी आ जाती है जिसके कारण हमारे शरीर मे या तो वह बुरा प्रभाव पड़ता है या पोषक तत्व कम होने से उसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है।        उत्पादन को बढ़ाने के लिए आजकल कुछ भी किया जा रहा है, यह सभी को पता है।     ...

Giloy and immune system

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 गिलोय और प्रतिरक्षा प्रणाली गिलोय ऐसा औषधीय पौधा जिसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मे असाधारण वृद्धि देखने को मिलती है।  यदि आपको लगता है कि प्रतिरक्षा में वृद्धि करना असंभव है, तो ऐसा नहीं है। प्रदूषित वातावरण, अनुचित खान-पान और रहन-सहन से हमारी प्रतिरक्षा निश्चित रूप से कमजोर हो गई है। इसके बावजूद, खोई हुई प्रतिरक्षा को भी पुनः प्राप्त किया जा सकता है। प्रतिरोध क्षमता कम होने के लक्षण 1) थोड़े गिले होने या आद्र वातावरण मे जुकाम जैसा लगना तथा कुछ घंटों मे समान्य हो जाना। 2) धूल भरी जगहों पर छींक आना तथा कुछ घंटों मे समान्य हो जाना। 3) ज़ख्म का जल्दी ठीक ना होना। 4) पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाना या गरिष्ठ भोजन पचा ना पाना। 5) त्वचा के रोग बार-बार होना। 6) सिर मे रूसी होना। 7) कफ का बार-बार आना। 8) शरीर का कभी गर्म तो कभी ठंडा हो जाना। 9) भोजन मे अरुचि रहना। आदि अनेक तरह के लक्षण दिखाई देते हैं मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का वर्णन किया गया है। इनमें से सबसे प्रभावी गिलोय या अमृता को माना जाता रहा है। ...