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माया का संसार

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माया का संसार माया का संसार तुम्हारा माया का संसार,  एक तरफ लगे  पासा दूजे तरफ तेज धार।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। १ **" जैसे उपजी काया से काया वैसे आई माया,  दूर का वासी भाई लगे, अपना भाई पराया,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। २ *** दूर बैठा वह देख रहा, तुम्हारी करतूतों को,  उसकी तरफ पीठ करके पूज रहे हो भूतों को,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ३ *** भूत तुम्हारे साथ खड़े हैं, आज अभी और कल,  तूने प्रभुनाम से बांध रखा, क्या मेरा रूप-विशाल।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ४ *** आँख खोल के देख जगत मे, मेरा क्या परमान,  आँख बंद कर देख पायेगा, जब करेगा मेरा ध्यान।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ५ *** जो सताता, जो सताया जाता, मेरा सबसे नाता,  मै ही कर्म,मै कर्ता - कारण, मै ही दण्ड, सुखदाता।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ६ *** तेरे सुख के लाखों उपाय, एक भी पाए तु तर जाय,  और किसी को जग ना भाये, देख पिछे,हमी को पाए।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ७ *** ऐसा बनाया...

Natural Compound and our life

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  Natural compound used in our daily life प्राकृतिक यौगिक का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किया जाना जरूरी क्यों है?  जिसे हम रोज दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, उसमे दो प्रकार के चीज़ शामिल होते हैं 1)-प्राकृतिक 2)-रासायनिक प्राकृतिक वह होता है, जो हमारे आस-पास शुद्ध रूप में पाया जाता है, या जिसे हम प्रकृति से सीधे प्राप्त करते हैं, जैसे ताजी हवा, ताजा पानी, फल-सब्जी, अनाज, आयुर्वेदिक औषधि आदि।        हमारा शरीर प्राकृतिक है और हर वह घटक जो प्रकृति मे शुद्ध रूप में मौजूद है वह हमारे शरीर तथा स्वास्थ्य के लिए उत्तम है, आजकल फल और सब्जियों में रसायन का प्रयोग किया जाता है जिससे फल या सब्जियों के प्राकृतिक तत्वों में आंशिक बदलाव हो जाता है और यह प्राकृतिक रूप से अशुद्ध हो जाती है। फलों और सब्जियों के स्वाद मे कमी और गुणवत्ता में कमी आ जाती है जिसके कारण हमारे शरीर मे या तो वह बुरा प्रभाव पड़ता है या पोषक तत्व कम होने से उसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है।        उत्पादन को बढ़ाने के लिए आजकल कुछ भी किया जा रहा है, यह सभी को पता है।     ...

Unusual state of Kundalini meditation

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 कुण्डलिनी ध्यान की अपूर्व स्थिति Unusual state of Kundalini meditation जब हम ध्यान की मुद्रा में सीधे बैठ जाते हैं ,तब हमारी रीढ़ सीधी और संतुलित हो जाती है।पूरे शरीर का भार  संतुलित हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे कि एक पेड़ जंगल के शांत वातावरण में अपने आपको सीधा खड़ा रख पाता है, यहां तक कि वह पेड़ इतना संतुलित होता है कि बिना जड़ों की सहायता लिए बिना भी वह सीधा टिकाए रखने में कोई परेशानी नहीं है। जब तक कि उसे बाहरी बल द्वारा उसकी संतुलन को बिगाड़ा ना जाए।       जब हम उस पेड़ की तरह अपने रीढ़ को सीधा और संतुलित करने में सफल हो जाते हैं, तब हमारे शरीर का भार हमें शून्य प्रतीत होने लगता है, और हमारी सरिरिक ऊर्जा जो कोशिकाओं में बिखरी हुई थी वह सिमट कर हमारे चक्रों पर एकत्रित होने लगते हैं, इस तरह हमारे कुंडली जागरण का मार्ग प्रशस्त होने लगता है, अब आप अपनी कुण्डलिनी ऊर्जा को महसूस कर, उसकी संरचना को समझ कर उसे जागृत कर सकते हैं। ऐसा शास्त्रों की भाषा में कहा गया है किन्तु मै इस क्रिया को कुंडली जागरण नहीं समझता, या यह कुंडली जागरण के लिए उचित सब्द नहीं लगता, हमें य...