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माया का संसार

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माया का संसार माया का संसार तुम्हारा माया का संसार,  एक तरफ लगे  पासा दूजे तरफ तेज धार।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। १ **" जैसे उपजी काया से काया वैसे आई माया,  दूर का वासी भाई लगे, अपना भाई पराया,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। २ *** दूर बैठा वह देख रहा, तुम्हारी करतूतों को,  उसकी तरफ पीठ करके पूज रहे हो भूतों को,  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ३ *** भूत तुम्हारे साथ खड़े हैं, आज अभी और कल,  तूने प्रभुनाम से बांध रखा, क्या मेरा रूप-विशाल।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ४ *** आँख खोल के देख जगत मे, मेरा क्या परमान,  आँख बंद कर देख पायेगा, जब करेगा मेरा ध्यान।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ५ *** जो सताता, जो सताया जाता, मेरा सबसे नाता,  मै ही कर्म,मै कर्ता - कारण, मै ही दण्ड, सुखदाता।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ६ *** तेरे सुख के लाखों उपाय, एक भी पाए तु तर जाय,  और किसी को जग ना भाये, देख पिछे,हमी को पाए।  माया का संसार तुम्हारा माया का संसार। ७ *** ऐसा बनाया...

Four piller of life

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 Life stay On four piller जीवन के चार स्तम्भ जीवन हमेशा से किसी एक आधार पर नहीं टिकी, जीवन के चार पिलर पर टिकी हुई है, अगर इनमे से कोई भी खंबा गिरा तो जीवन रूपी मकान धराशाई हो जाएगा।  1)- सूर्य - सूर्य हमारे जिवित होने का सबसे पहला स्तम्भ कहा जा सकता है, जिसने अपने ताप ऊर्जा के निश्चित दूरी पर धरती को स्थान दिया साथ ही अपनी गुरुत्व से धरती को अपनी धुरी पर टिका कर रखती है। अन्य ग्रहो पर जीवन नहीं है इसलिए यह प्रमाणित हो जाता है कि जीवन को को पनपने के लिए, कोई भी पिंड को ऊर्जा स्रोत वाले तारे से नियत दूरी पर मौजूद होना। आपको यह ज्ञात हो कि सूर्य के करीब के ग्रह ज्यादा गर्म और सूर्य से दूर के ग्रह ज्यादा ठंडे होते हैं, सूर्य से दूरी, सूर्य की परिक्रमा, धरती की घुर्णन, आदि भी सूर्य ऊर्जा के ही कारण होती है यह हम मान सकते हैं, 2)- वायु -  वायु जीवन का दुसरा सबसे बड़ा कारण है कि पृथ्वी पर जीवन सम्भव है, वायु धरती के हर खाली स्थान को भर देता है, साथ ही अपने अंदर से किसी भी चीज़ को गमन होने देता है, कल्पना कीजिए अगर हवा कोई ठोस वस्तु होती तो क्या यह आपके काम आ सकती थीं? क्या हम अ...

Natural Compound and our life

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  Natural compound used in our daily life प्राकृतिक यौगिक का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किया जाना जरूरी क्यों है?  जिसे हम रोज दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, उसमे दो प्रकार के चीज़ शामिल होते हैं 1)-प्राकृतिक 2)-रासायनिक प्राकृतिक वह होता है, जो हमारे आस-पास शुद्ध रूप में पाया जाता है, या जिसे हम प्रकृति से सीधे प्राप्त करते हैं, जैसे ताजी हवा, ताजा पानी, फल-सब्जी, अनाज, आयुर्वेदिक औषधि आदि।        हमारा शरीर प्राकृतिक है और हर वह घटक जो प्रकृति मे शुद्ध रूप में मौजूद है वह हमारे शरीर तथा स्वास्थ्य के लिए उत्तम है, आजकल फल और सब्जियों में रसायन का प्रयोग किया जाता है जिससे फल या सब्जियों के प्राकृतिक तत्वों में आंशिक बदलाव हो जाता है और यह प्राकृतिक रूप से अशुद्ध हो जाती है। फलों और सब्जियों के स्वाद मे कमी और गुणवत्ता में कमी आ जाती है जिसके कारण हमारे शरीर मे या तो वह बुरा प्रभाव पड़ता है या पोषक तत्व कम होने से उसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है।        उत्पादन को बढ़ाने के लिए आजकल कुछ भी किया जा रहा है, यह सभी को पता है।     ...

Unusual state of Kundalini meditation

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 कुण्डलिनी ध्यान की अपूर्व स्थिति Unusual state of Kundalini meditation जब हम ध्यान की मुद्रा में सीधे बैठ जाते हैं ,तब हमारी रीढ़ सीधी और संतुलित हो जाती है।पूरे शरीर का भार  संतुलित हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे कि एक पेड़ जंगल के शांत वातावरण में अपने आपको सीधा खड़ा रख पाता है, यहां तक कि वह पेड़ इतना संतुलित होता है कि बिना जड़ों की सहायता लिए बिना भी वह सीधा टिकाए रखने में कोई परेशानी नहीं है। जब तक कि उसे बाहरी बल द्वारा उसकी संतुलन को बिगाड़ा ना जाए।       जब हम उस पेड़ की तरह अपने रीढ़ को सीधा और संतुलित करने में सफल हो जाते हैं, तब हमारे शरीर का भार हमें शून्य प्रतीत होने लगता है, और हमारी सरिरिक ऊर्जा जो कोशिकाओं में बिखरी हुई थी वह सिमट कर हमारे चक्रों पर एकत्रित होने लगते हैं, इस तरह हमारे कुंडली जागरण का मार्ग प्रशस्त होने लगता है, अब आप अपनी कुण्डलिनी ऊर्जा को महसूस कर, उसकी संरचना को समझ कर उसे जागृत कर सकते हैं। ऐसा शास्त्रों की भाषा में कहा गया है किन्तु मै इस क्रिया को कुंडली जागरण नहीं समझता, या यह कुंडली जागरण के लिए उचित सब्द नहीं लगता, हमें य...

How to succeed सफलता कैसे मिले

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 सफलता कैसे मिले  How to succeed एक सन्यासी जो अपनी सारी उम्र गहरी अध्यात्म की खोज की, अद्भुत ज्ञान दिए, जब ओ अंतिम सांसें गिन रहे थे, उनका एक शिष्य सेवक लाल ने उनसे आखिरी बार एक सवाल किया और पूछा जाते जाते यह बता दीजिए की आपके गुरु कौन थे,   स न्यासी बोले यह मत पूछो की मेरे गुरु कौन थे, क्यूंकि अब मेरे पास सांसें कम हैं जबाब बहुत लंबा हो जाएगा और तुम समझ ना सकोगे,  सेवक राम बोला गुरुजी छोटे शब्दों मे कुछ तो बता कर जाइए, जानना चाहता है तो सुनो इससे कम शब्दों में ना कह सकूँगा, मै नदी किनारे बैठ कर नदी के शांति से बहती धाराओं को देख रहा था, अपने उलझने सुलझाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, तभी एक प्यासा कुत्ता किनारे पर आ खडा हुआ, वह गर्मी से बेहाल था, और हांफ रहा था, उसे जोरों की प्यास लगी ,  वह बढ़कर नदी की तरह सर झुकाया और डर कर एक कदम पीछे आ गया और जोर से भौका, पानी पर बनी उसकी परछाई ने भी भौकने की उसी की आवाज सुनाई दी, अब कुत्ते को क्या पता मैं कैसा दिखता हूं, सच मे दूसरा कुत्ता है या मेरी परछाईं है, वह उसे डराने की कोशिश की, प्रतिक्रिया भी वैसा ही मिला, उसने...

How to understand enlightenment आत्मज्ञान को कैसे समझें

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आत्मज्ञान को कैसे समझें  How to understand enlightenment आत्मज्ञान होना चूजे के अंडे के बाहर आने जैसा है, हम उस तरह दुनियाँ को देख सकते हैं जैसा वह है, मजे की बात यह है कि हमे फिर कुछ भी कर पाना असंभव नहीं रह जाता, जैसे कि हम अपने जीवन में कर सकते हैं, आप उठ सकते हैं, आप भावनाएँ व्यक्त कर सकते हैं, आप दुःखी हों तो आप रो सकते हैं, प्रसन्न हों तो आप नाच सकते हैं, आप या हम इसे एक जीवन के रूप में देखते हैं।      अंडे में रहकर चूजा यह महसूस कर सकता है कि इस खोल के बाहर कुछ हो रहा है, क्यूकी बाहरी हलचल से अंडे का खोल कम्पित होगा तो चूजा उत्पन्न हो रही तरंगों से इतना अनुभव कर सकता है, तो क्या हम ऐसे ही चूजे हैं जो अंडे तोड़कर बाहर आ गए हैं, अखिर माँ का कोख भी बच्चे के लिए अंडे के अंदर ही रहने जैसा है, बच्चा सुन सकता है, महसूस कर सकता है, कम से कम जितना वह विकसित हो चुका है। तो सवाल यह है कि क्या हम आत्मज्ञान में हैं, अवश्य हम आत्मज्ञान मे हैं बशर्ते कि आप जागरूक हों कि आप कौन हैं और आपके जीवन का मकसद क्या है, क्यूकी इंसान के पास ऐसा विकसित दिमाग है कि वह, इतना कु...