How to understand enlightenment आत्मज्ञान को कैसे समझें
आत्मज्ञान को कैसे समझें How to understand enlightenment
आत्मज्ञान होना चूजे के अंडे के बाहर आने जैसा है, हम उस तरह दुनियाँ को देख सकते हैं जैसा वह है, मजे की बात यह है कि हमे फिर कुछ भी कर पाना असंभव नहीं रह जाता, जैसे कि हम अपने जीवन में कर सकते हैं, आप उठ सकते हैं, आप भावनाएँ व्यक्त कर सकते हैं, आप दुःखी हों तो आप रो सकते हैं, प्रसन्न हों तो आप नाच सकते हैं, आप या हम इसे एक जीवन के रूप में देखते हैं।
अंडे में रहकर चूजा यह महसूस कर सकता है कि इस खोल के बाहर कुछ हो रहा है, क्यूकी बाहरी हलचल से अंडे का खोल कम्पित होगा तो चूजा उत्पन्न हो रही तरंगों से इतना अनुभव कर सकता है, तो क्या हम ऐसे ही चूजे हैं जो अंडे तोड़कर बाहर आ गए हैं, अखिर माँ का कोख भी बच्चे के लिए अंडे के अंदर ही रहने जैसा है, बच्चा सुन सकता है, महसूस कर सकता है, कम से कम जितना वह विकसित हो चुका है। तो सवाल यह है कि क्या हम आत्मज्ञान में हैं, अवश्य हम आत्मज्ञान मे हैं बशर्ते कि आप जागरूक हों कि आप कौन हैं और आपके जीवन का मकसद क्या है, क्यूकी इंसान के पास ऐसा विकसित दिमाग है कि वह, इतना कुछ करने में सक्षम है, आप जागरूक हो सकते हैं और लाइफ का तुलनात्मक अध्ययन कर सकते हैं, अपने या किसी और का लेखा जोखा रख सकते हैं। आत्मज्ञान एक अलग आयाम है जो अभौतिक से भौतिक या कहें भौतिक से अभौतिक में जाने जैसा है, अगर आप मान लें कि अभी भी आप अंडे के अंदर हैं, तो आत्मज्ञान होने का अर्थ है अंडे से बाहर आना और जिसे हम महसुस कर रहे थे उसे प्रत्यक्ष देख पाना या अपने आपको इस परिवेश मे शामिल कर लेना या इस दुनियां का हिस्सा बन जाना।
स्वाभाविक है कि आत्मज्ञानी होने का मतलब है कि उस सागर मे डूब जाना जहां काम करने का या होने का अलग ही तरीका है,जहाँ हमें जिन्दा रहने के लिए जद्दोजहद करनी होती है, बहुत सारी क्रियाएं करनी होती है तो आत्मज्ञान होने का मतलब है कि आप किसी दूसरे आयाम को महसुस कर रहे हैं, अगर आप इस दुनियां की परत को हटा दें तो आप आत्मज्ञान का अनुभव कर सकते हैं, तब आप जीवन की वास्तविकता मे जा सकते हैं और आप भूत और भविष्य के गहरे सागर में उतर सकते हैं, जीवन के गहरे रहस्य को समझ सकते हैं।
गुरूदेव किस आत्मज्ञान की बात करते हैं आइए इसे समझने का प्रयास करते हैं।
हम जिस दुनियाँ मे रहते हैं यह भौतिक दुनिया है, यहां जो कुछ भी हो रहा है उसके पीछे उसका कारण छुपा हुआ है, क्या आप यह नहीं मानते कि धरती के घूमने का भी कोई कारण है, हवा के चलने का कोई ना कोई वजह है, पानी के बरसने का, किसी पर प्यार बरसाने या किसी से घोर दुश्मनी का कोई ना कोई कारण अवश्य होता है, योगी जब इन कारणों की तह तक चला जाए, जब सारे रहस्य से पर्दा उठ जाए, कुछ भी जानने योग्य ना रह जाए,देखने या सोचने में अद्भुत स्पष्टता आ जाए, कोई अधिक बुरा ना कोई अधिक भला दिखाई देने लगे अर्थात जीव के बीच का भेद समाप्त हो जाए, आत्मज्ञान में जाना जैसे पाने और खोने के परे चले जाना क्योंकि कोई भी कहीं कुछ लेकर नहीं जा सकता ना कुछ लेकर आ सकते हैं, हमे खुद से पूछना चाहिए कि आप माँ के कोख से क्या लेकर आए थे, जाते टाइम क्या लेकर जाएंगे यह अपने आप समझ मे आ जाएगा । आप अपनी अनुभव शेयर करने की कृपा करें comment मे लिखें , मेरा लेख पसंद आया हो तो अपने दोस्तों मे शेयर करना ना भूलें।
धन्यवाद



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