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देश की दिशा बदलने वाली है

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   देश की दिशा बदलने वाली है   — एक समग्र दृष्टिकोण से भारत का बदलता भविष्य भारत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जानिए धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक बदलावों के जरिए कैसे देश की दिशा बदल रही है। यह लेख भारत के भविष्य की गहराई से पड़ताल करता है। प्रस्तावना: क्या देश सच में बदल रहा है? भारत, जो सदियों से विविधताओं, संघर्षों और संस्कृतियों का संगम रहा है, आज नए युग की दहलीज पर खड़ा है। धार्मिक जागरण, सामाजिक सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राजनैतिक चेतना — ये चार स्तंभ आज देश की दिशा तय कर रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि क्या देश बदलेगा, सवाल है कि हम उसे किस दिशा में बदलना चाहते हैं। क्या हमारी दिशा जन कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ रही है, या किसी स्वार्थ, स्वहित के साथ दूसरों की हानि के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।  हम चर्चा करेंगे उसकी जो हो सकती है या होने की दिशा मे है, हम उसकी बात नहीं करते जो किया जा सकता था। क्योकि जो समय की धारा बदल जाए ऐसी छमता एक दिन मे नही आती, बल्कि यह छमता धीरे-धीरे बलवान होती है और गति करती है।   धार्मिक चेतना का पु...

Destroying history of Shriram temple

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श्रीराम मंदिर का विध्वंसक इतिहास Destroying history of Shriram temple  अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल का सफाया कर देंगे,ठीक उसी तरह जैसे राणा संग्राम सिंह के मात्र 30 हजार सैनिकों ने बाबर के 1 लाख सैनिकों को गाजर-मूली की तरह काट डाला था। इसलिए भारत को जीतने का एक मात्र रास्ता यही है कि हिन्दू समाज और हिन्दुत्व के चेतना-स्थल राम मंदिर के स्थान पर मस्जिद खड़ी कर दी जाए। यह बाबरी मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध हो जाएगी और यही हिन्दुस्थान पर बाबर की विजय का स्तम्भ होगी। दोनों मुसलमान फकीरों ने बाबर को समझाया कि हिन्दुओं के मंदिरों, धर्मग्रंथों, गौशालाओं, पुस्तकालयों, शिक्षा के केन्द्रों और इसी प्रकार के हजारों मानबिंदुओं को समाप्त किए बिना भारत में मुसलमानों का वर्चस्व स्थापित करना असंभव है। यही संस्कृति-केन्द्र वास्तव में हिन्दू समाज के प्रेरणा स्रोत हैं। इन्हीं ...