Unusual state of Kundalini meditation
कुण्डलिनी ध्यान की अपूर्व स्थिति Unusual state of Kundalini meditation जब हम ध्यान की मुद्रा में सीधे बैठ जाते हैं ,तब हमारी रीढ़ सीधी और संतुलित हो जाती है।पूरे शरीर का भार संतुलित हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे कि एक पेड़ जंगल के शांत वातावरण में अपने आपको सीधा खड़ा रख पाता है, यहां तक कि वह पेड़ इतना संतुलित होता है कि बिना जड़ों की सहायता लिए बिना भी वह सीधा टिकाए रखने में कोई परेशानी नहीं है। जब तक कि उसे बाहरी बल द्वारा उसकी संतुलन को बिगाड़ा ना जाए। जब हम उस पेड़ की तरह अपने रीढ़ को सीधा और संतुलित करने में सफल हो जाते हैं, तब हमारे शरीर का भार हमें शून्य प्रतीत होने लगता है, और हमारी सरिरिक ऊर्जा जो कोशिकाओं में बिखरी हुई थी वह सिमट कर हमारे चक्रों पर एकत्रित होने लगते हैं, इस तरह हमारे कुंडली जागरण का मार्ग प्रशस्त होने लगता है, अब आप अपनी कुण्डलिनी ऊर्जा को महसूस कर, उसकी संरचना को समझ कर उसे जागृत कर सकते हैं। ऐसा शास्त्रों की भाषा में कहा गया है किन्तु मै इस क्रिया को कुंडली जागरण नहीं समझता, या यह कुंडली जागरण के लिए उचित सब्द नहीं लगता, हमें य...