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How to understand enlightenment आत्मज्ञान को कैसे समझें

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आत्मज्ञान को कैसे समझें  How to understand enlightenment आत्मज्ञान होना चूजे के अंडे के बाहर आने जैसा है, हम उस तरह दुनियाँ को देख सकते हैं जैसा वह है, मजे की बात यह है कि हमे फिर कुछ भी कर पाना असंभव नहीं रह जाता, जैसे कि हम अपने जीवन में कर सकते हैं, आप उठ सकते हैं, आप भावनाएँ व्यक्त कर सकते हैं, आप दुःखी हों तो आप रो सकते हैं, प्रसन्न हों तो आप नाच सकते हैं, आप या हम इसे एक जीवन के रूप में देखते हैं।      अंडे में रहकर चूजा यह महसूस कर सकता है कि इस खोल के बाहर कुछ हो रहा है, क्यूकी बाहरी हलचल से अंडे का खोल कम्पित होगा तो चूजा उत्पन्न हो रही तरंगों से इतना अनुभव कर सकता है, तो क्या हम ऐसे ही चूजे हैं जो अंडे तोड़कर बाहर आ गए हैं, अखिर माँ का कोख भी बच्चे के लिए अंडे के अंदर ही रहने जैसा है, बच्चा सुन सकता है, महसूस कर सकता है, कम से कम जितना वह विकसित हो चुका है। तो सवाल यह है कि क्या हम आत्मज्ञान में हैं, अवश्य हम आत्मज्ञान मे हैं बशर्ते कि आप जागरूक हों कि आप कौन हैं और आपके जीवन का मकसद क्या है, क्यूकी इंसान के पास ऐसा विकसित दिमाग है कि वह, इतना कु...