निधिवन - जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास
निधिवन - जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास 5200 वर्ष पूर्व वृन्दावन की इसी धरा पर कान्हा जी ने राधारानी और गोपियों संग महारास रचाया था... द्वापर युग से आज तक हर रात राधे-कृष्ण यहां साक्षात प्रकट होते है... निधिवन में स्थित 16108 वृक्ष गोपियों मेंतब्दील होकर रातभर कान्हा संग महारास रचाती है... सूरज की पहली किरण फूटने से पहले ही गोपियां वृक्ष का आकार ले लेती है.. और भगवान कृष्ण राधिका रानी के संग अन्तर्धान हो जाते है। एक बार कलकत्ता का एक भक्त अपने गुरु की सुनाई हुई भागवत कथा से इतना मोहित हुआ कि वह हरसमय वृन्दावन आने की सोचने लगा उसके गुरु उसे निधिवन के बारे में बताया करते थे और कहते थे कि आज भी भगवान यहाँ रात्रि को रास रचाने आते है उस भक्त को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था और एक बार उसने निश्चय किया कि वृन्दावन जाऊंगा और ऐसा ही हुआ श्री राधा रानी की कृपा हुई और आ गया वृन्दावन उसने जी भर कर बिहारी जीका राधा रानी का दर्शन किया लेकिन अब भी उसे इसबात का यकीन नहीं था कि निधिवन में रात्रि को भगवान रास रचाते है उसने सोचा कि एक दिन निधिवन रुक कर देखता हू इसलिए वो वही पर रूक गयाऔर देर तक...