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अनहोनी कुछ भी नहीं nothing happens without reason

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अनहोनी कुछ भी नहीं   nothing happens without reason मित्रों होनी और इसका ऑपोजिट वर्ड अनहोनी के बारे में आप भली प्रकार परिचित होंगे और आपके पास हो रही घटनाओं में आप इन शब्दों का उपयोग करते ही होंगे आप योगी मानते होंगे कि आपके साथ भी कोई ऐसी ही घटना जरूर हुई होगी या आपके किसी मित्र या पड़ोसी के साथ भी ऐसी घटना का जिक्र आया होगा बाइक चलाते हुए हुआ एक्सीडेंट  क्या अनहोनी है यह कोई अनहोनी नहीं बल्कि होनी है, जो भी इस संसार में वर्तमान में हो रही है वह 100% होनी है अनहोनी नहीं। आज तक इस संसार में कुछ भी अनहोनी नहीं हुई यह प्रकृति का नियम है कि किसी भी परिणाम के पीछे कोई ना कोई कारण अवश्य ही होती है हम इसे नकार नहीं सकते हम यह भी कहते हैं कि होनी को कौन टाल सकता है अर्थात जो इस संसार में हो रहा है उसे टाला नहीं जा सकता तो यह अनहोनी जैसी शब्द कहां से आई बेशक यह शब्द वहां से बनती है जहां अज्ञानता है, जब हमें यह नहीं पता होता कि यह कैसे हुआ तो हम यह मान लेते हैं कि ऐसा होना ही नहीं चाहिए था फिर भी हो गया अथार्त होनी नहीं अनहोनी है। अनहोनी नाम की कोई शब्द नहीं होती उन्होंने उन लोगो...

Power of six sense छठी इंद्रिय की क्षमता

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Power of six sense छठी इंद्रिय की क्षमता इस ब्रह्मांड की हर चीज गति कर रही है, परम सत्य है और इस संसार की हर वस्तु गतिमान है, जिसे हम स्थिर मान रहे होते हैं जैसे घर पहाड़ खंभा आवर पेड़-पौधे इत्यादि इत्यादि सब गतिमान हैं भले ही हमे यह स्थिर महसूस  होता है।         धरती घूम रही है उसी के साथ सभी जीव जंतु नदी पहाड़ घर सभी गति कर रहे हैं, यह एक भौतिक प्रक्रिया की गति है हमारे अंदर या किसी भी वस्तु जीव या निर्जीव सबके अंदर अणु गति कर रहे हैं।           जीव या निर्जीव एक दूसरे के ऊपर अपनी क्षमता के अनुरूप हर वस्तु जीव या निर्जीव पर अपना प्रभाव दिखाते हैं जब हम अकेले किसी कमरे में बैठे होते हैं तो घर में रखे सामान की मैग्नेटिक फील्ड और हमारी मैग्नेटिक फील्ड या घर की मैग्नेटिक फील्ड और हमारी मैग्नेटिक फील्ड आपस में जुड़े रहते हैं, इसका हमें इसका ज्ञान नहीं होता, हम इस पर कभी ध्यान नहीं देते वह निरंतर चल रहा होता है, ओ हमारे ऊपर पॉजिटिव या नेगेटिव प्रभाव डाल रहे होते हैं, इसे जानने के लिए आपको थोड़ा ज्यादा संवेदनशील होना होगा आप जितना ज्...

निधिवन - जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास

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निधिवन - जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास 5200 वर्ष पूर्व वृन्दावन की इसी धरा पर कान्हा जी ने राधारानी और गोपियों संग महारास रचाया था... द्वापर युग से आज तक हर रात राधे-कृष्ण यहां साक्षात प्रकट होते है... निधिवन में स्थित 16108 वृक्ष गोपियों मेंतब्दील होकर रातभर कान्हा संग महारास रचाती है... सूरज की पहली किरण फूटने से पहले ही गोपियां वृक्ष का आकार ले लेती है.. और भगवान कृष्ण राधिका रानी के संग अन्तर्धान हो जाते है। एक बार कलकत्ता का एक भक्त अपने गुरु की सुनाई हुई भागवत कथा से इतना मोहित हुआ कि वह हरसमय वृन्दावन आने की सोचने लगा उसके गुरु उसे निधिवन के बारे में बताया करते थे और कहते थे कि आज भी भगवान यहाँ रात्रि को रास रचाने आते है उस भक्त को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था और एक बार उसने निश्चय किया कि वृन्दावन जाऊंगा और ऐसा ही हुआ श्री राधा रानी की कृपा हुई और आ गया वृन्दावन उसने जी भर कर बिहारी जीका राधा रानी का दर्शन किया लेकिन अब भी उसे इसबात का यकीन नहीं था कि निधिवन में रात्रि को भगवान रास रचाते है उसने सोचा कि एक दिन निधिवन रुक कर देखता हू इसलिए वो वही पर रूक गयाऔर देर तक...