Power of six sense छठी इंद्रिय की क्षमता

Power of six sense छठी इंद्रिय की क्षमता


इस ब्रह्मांड की हर चीज गति कर रही है, परम सत्य है और इस संसार की हर वस्तु गतिमान है, जिसे हम स्थिर मान रहे होते हैं जैसे घर पहाड़ खंभा आवर पेड़-पौधे इत्यादि इत्यादि सब गतिमान हैं भले ही हमे यह स्थिर महसूस  होता है।
        धरती घूम रही है उसी के साथ सभी जीव जंतु नदी पहाड़ घर सभी गति कर रहे हैं, यह एक भौतिक प्रक्रिया की गति है हमारे अंदर या किसी भी वस्तु जीव या निर्जीव सबके अंदर अणु गति कर रहे हैं।
Prakash Patel

          जीव या निर्जीव एक दूसरे के ऊपर अपनी क्षमता के अनुरूप हर वस्तु जीव या निर्जीव पर अपना प्रभाव दिखाते हैं जब हम अकेले किसी कमरे में बैठे होते हैं तो घर में रखे सामान की मैग्नेटिक फील्ड और हमारी मैग्नेटिक फील्ड या घर की मैग्नेटिक फील्ड और हमारी मैग्नेटिक फील्ड आपस में जुड़े रहते हैं, इसका हमें इसका ज्ञान नहीं होता, हम इस पर कभी ध्यान नहीं देते वह निरंतर चल रहा होता है, ओ हमारे ऊपर पॉजिटिव या नेगेटिव प्रभाव डाल रहे होते हैं, इसे जानने के लिए आपको थोड़ा ज्यादा संवेदनशील होना होगा आप जितना ज्यादा संवेदनशील होंगे आप हर चीज जीव या निर्जीव पर होने वाले प्रभाव को जान सकते हैं और अपनी इच्छा से आप उस शक्ति को उपयोग कर सकते हैं, यह बहुत आसान है आपको अपने माइंड की अदृश्य शक्ति को निर्देश देना है, वैसे तो ओ आपके निर्देश के बिना ही अपना काम कर रहे हैं पर आप चाहें तो इसमे आप अपनी इच्छा अनुरूप परिवर्तन कर सकते हैं।

इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं

    आप ए मान ले की आप किसी से पहली बार मुलाकात कर रहे हैं आपको अपने magnetic fild पर फोकस करना है ए मान ले की आपका आभामंडल धनात्मक ऊर्जा को छोड़ रही है, अब आप पॉज़िटिव महसूस करने लगेंगे, तब आपको अपनी सिक्स सेंस को एक्टिव कर सामने वाले के आभामंडल या उसकी magnetic pawer को महसूस करना है, याद हो कि आप उसकी आभामंडल को बदलने का प्रयास ना करें, उसमे से आ रही magnetic पावर के सकारात्मक एवं नकारात्मक ऊर्जा मे आपको अपनी ऊर्जा को जोड़ना है, आप यह उससे बात करते हुए भी कर सकते हैं, अब आपको अपनी इच्छाओं के अनुरूप अपने magnetic शक्ति मे सकारात्मक एवं नकारात्मक ऊर्जा को ध्यान में रखते हुए कुछ को एक्टिव एवं कुछ को deactivate करना है, अब आपको काफी हद तक पॉज़िटिव होता हुआ महसूस होगा, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि प्रकृति के बनाए नियम निरंतर चलती रहती है उसे बदलना इंसान के हाथ में नही है लेकिन आपको अपने आपको बदल कर उसकी दिशा मे ही कुछ सकारात्मक बदलाव संभव है।


       एस्ट्रोलॉजी के अनुसार ब्रह्मांड की हर तारा ग्रह नक्षत्र आदि हमारे शरीर एवं हमारे कर्म करने पर अपना प्रभाव डालती हैं हर जीव का निर्माण एवं उसकी प्रकृति ब्रह्मांड से आने वाली ऊर्जा का ही परिणाम होता है, एक या दो उदाहरण हम आपको आभास करा सकते हैं मान लीजिए कि रात को जब आप सोए तो सूर्य उदय हि ना हो, या गायब हो जाए तो चंद्रमा भी स्वयं गायब हो जाएगा अथवा दिखाई नहीं देगा क्योंकि हमें पता है कि सूर्य की रोशनी से ही हमारा चांद रोशन होता है, और क्या क्या प्रभाव पड़ेगा इसका कल्पना मात्र है बहुत भयानक है, धरती पर लगभग समाप्त हो जाएगा इसका मतलब साफ है कि सूर्य और चांद धरती पर जीवन के प्रमुख जीवन दाता हैं, इसके बाद ब्रह्मांड के अन्य पिंड जीवन को चैतन्य करने में मदद या अपना अंशदान करते हैं, और जीवन बहाल हो जाता है। इन पिंडों के निश्चित प्रभाव से ही धरती पर जीवन संभव है।

  न्यूटन के गति के तीसरे नियम सिद्धांत के अनुसार हर वस्तु क्रिया के बराबर प्रतिक्रिया देती है यह एक सिद्धांत है, और य‍ह केवल बल पर ही नहीं अपितु संसार की हर सूक्ष्म से सूक्ष्म चीजों पर उतना ही प्रभाव डाल डालती है। आपने कभी देखा होगा या महसूस किया होगा जब कोई पौधा ऊपर की ओर बढ़ रहा होता है, और जब उसकी सीध में कोई रुकावट पैदा करने वाली चीज आती है, तो वह साइड से झुक कर अपना रास्ता निकाल लेता है, या जब दो अलग-अलग वृक्ष पास पास लगे होते हैं तो वह एक दूसरे की मैग्नेटिक फील्ड या आभामंडल से प्रभावित होकर ऑपोजिट दिशा में बढ़ने का प्रयास करते हैं, उनकी शाखाओं का झुकाव हमेशा वितरित होता है, जहां पेड़ पौधों में भी कितना सेंस होता है तो हम तो इंसान हैं जैसे कि मैंने बताया कि हर इंसान की मैग्नेटिक फील्ड होती है और वह हर वस्तु पर अपना प्रभाव डालती है।
   इंसान का माइंड उसकी खोपड़ी के अंदर होता है लेकिन उसका प्रभाव अनंत तक होता है।
      आपने कभी थर्ड आई या छठी इंद्रिय का नाम जरूर सुना होगा, वह क्या है? क्या काम करती है? करती है या नहीं?
      मेरा कहना है कि हर जीव की छठी इंद्रिय होती है, यह केवल  इंसानों के पास ही नहीं सबके पास होती है, किसी में कम किसी में ज्यादा प्रभावी हो सकती है, पर यह होती जरूर है।

   हमारे मस्तिष्क में अंतर्मन के केंद्र में एक बिंदू होता है जो हमें ब्रम्हांड का ज्ञान देती है जिसके माध्यम से हमारा शरीर निरंतर उनके गणना के आधार पर काम कर रहा होता है। और हमारे शरीर में पैदा हो रहे मैग्नेटिक फील्ड से जुड़ा हुआ होता है या आभामंडल बना लिया होता है यही सिक्स सेंस ही हमें हमारे आसपास होने वाली क्रियाओं से अवगत कराता है, इसका ज्ञान कराता है एवं बोध कराता है और हम इसे छठी इंद्रिय मान लेते हैं, यही वह प्रकाश पुंज है जो हमें आभास कराता है कि जो हमारे सामने हैं वह क्या है? उसकी कमजोरी क्या है? उसकी खूबियों क्या है? अगर हम ब्रह्मांड में हो रही हलचल के बारे में सटीक जानकारी या आभास रखते हैं ज्ञान रखते हैं तो आप किसी भी भविष्यवाणी बिना किसी शास्त्र ज्ञान के भी सटीक कर सकते हैं यह एक अद्भुत ज्ञान है।
 धन्यवाद
आपका दोस्त
Prakash Patel

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