अनहोनी कुछ भी नहीं nothing happens without reason

अनहोनी कुछ भी नहीं

 nothing happens without reason


मित्रों होनी और इसका ऑपोजिट वर्ड अनहोनी के बारे में आप भली प्रकार परिचित होंगे और आपके पास हो रही घटनाओं में आप इन शब्दों का उपयोग करते ही होंगे आप योगी मानते होंगे कि आपके साथ भी कोई ऐसी ही घटना जरूर हुई होगी या आपके किसी मित्र या पड़ोसी के साथ भी ऐसी घटना का जिक्र आया होगा बाइक चलाते हुए हुआ एक्सीडेंट  क्या अनहोनी है यह कोई अनहोनी नहीं बल्कि होनी है, जो भी इस संसार में वर्तमान में हो रही है वह 100% होनी है अनहोनी नहीं। आज तक इस संसार में कुछ भी अनहोनी नहीं हुई यह प्रकृति का नियम है कि किसी भी परिणाम के पीछे कोई ना कोई कारण अवश्य ही होती है हम इसे नकार नहीं सकते हम यह भी कहते हैं कि होनी को कौन टाल सकता है अर्थात जो इस संसार में हो रहा है उसे टाला नहीं जा सकता तो यह अनहोनी जैसी शब्द कहां से आई बेशक यह शब्द वहां से बनती है जहां अज्ञानता है, जब हमें यह नहीं पता होता कि यह कैसे हुआ तो हम यह मान लेते हैं कि ऐसा होना ही नहीं चाहिए था फिर भी हो गया अथार्त होनी नहीं अनहोनी है। अनहोनी नाम की कोई शब्द नहीं होती उन्होंने उन लोगों की काल्पनिक देन है जो पूर्व जन्म पर विश्वास तो करते हैं पर यहाँ पर ओ अति आत्मविश्वास करने लगते हैं और  इन नए शब्द का जन्म दे देते हैं जिसे वह अनहोनी कहते हैं।
Nothing happens without reason

        मैं अपने आपको कोई ज्ञानी पुरुष नहीं मानता पर मैं यह मानता हूं कि एक मनुष्य होने के नाते मैं स्वतंत्र रूप से सोचने और जीने का अधिकार रखता हूं शास्त्रों के अनुसार जो पूर्व जन्म पर विश्वास करते हैं वह यह मानते हैं कि इंसान जैसा कर्म करता है वैसा ही योनि उसे अगले जन्म में मिलती है मैं आपको कुछ तथ्यों के आधार पर यह बताने कि कोशिश करूंगा कि इस संसार में जो भी होता है।
 कर्मफल का सिद्धांत
इसकी परिभाषा जो विद्वानों ने दी है उसका धार्मिक आधार बनाया गया है  वो इसलिए कि इसे लोगों को समझने में धार्मिक भावनात्मक सहयोग प्राप्त होती है, और यह उनकी आस्था से जुड़ जाता है और उनके कर्मों में सकारात्मक बदलाव की स्थिति आती है, जो धर्म का काम है बखूबी उन्होंने किया उन्हें शत शत नमन,
परंतु कर्मफल का सिद्धांत या कहता है कि जैसा हम कर्म करेंगे उसका परिणाम हमें वैसा ही 100% प्राप्त होगा इसमें कोई संदेह नहीं परंतु प्रकृति में अच्छा या बुरा कोई भी कर्म होता ही नहीं कर्म एक स्वतंत्र रूप से ही पूर्ण शब्द है।
 जिस कार्य को करने से समाज में गलत धारणा जाती है अथवा जिस कर्म से हमारे जीवन में नकारात्मक परिणाम निकल कर आते हैं, जिस कर्मों से हम अनुचित परिणाम प्राप्त करते हैं, बेशक इंसान होने के नाते हमें दुष्कर्म कर्मों से दूर रहना चाहिए।

  मनुष्य की जाति का औचित्य ही क्या है जिस महान सत्ता के सृष्टि में दखल कर सके या उसमें कोई अपना रचा हुआ पाठ जोड़ सके उस परम सत्ता को सब पता है कि इंसान क्या क्या कर सकता है, और उन्होंने छाया तक का निर्माण कर दिया मैंने यहां "छाया" शब्द का प्रयोग किया है जब उस ईश्वर ने ऐसी कोई चीज नहीं बनाई जिस पर कार्य किया गया हो या हुआ हो उसका परिणाम शुन्य हो। जहां रोशनी होगी वहां छाया भी होगा अगर रोशनी प्रयोग है तो छाया उसका परिणाम है।
तो टॉपिक से हम दूर आ गए अब थोड़ा विषय की ओर चलते हैं मैंने कहा कि अनहोनी नाम की कोई शब्द ही नहीं है जो भी मूल शब्द है वहहोनी अथार्त जो होना है।
विज्ञान भी कहता है कि जितनी क्रिया होगी उतनी ही प्रतिक्रिया होगी सांपों को छेड़ने वाला उनके दंश का शिकार हो जाए तो इसमें कोई अनहोनी नहीं है यह तो होनी ही है।
  जितना ईंधन डालेंगे आग उतनी ही जलेगी, किसी अनहोनी से कम या अधिक नहीं जल सकती और फिर भी कोई कहे कि नहीं इन तथ्यों के आधार पर, ये अनहोनी ही है तो किसी भी परिणाम का कोई ना कोई वजह या कारण जरूर होता है, जिसे यह बात समझ में अच्छे से नहीं आती इसे अनहोनी बोलकर लोग किनारा कर लेते हैं क्योंकि यह बात बहुत गहन में चलती चली जाएगी और वह उसकी व्याख्या लोगों तक पहुंचाने में और असहज या असमर्थ महसूस करने लगते हैं और अनहोनी शब्द का जन्म हो जाता है।
हाथ में पेन है, पेन में स्याही है, पेन की निब सही है, स्याही निब की नोक तक आ रही है, और आप कागज पर निब को घिस रहे हैं, तो कुछ आकार बनेंगे, अगर कुछ आकार बनेंगे तो कुछ तथ्य निकल कर आएंगे ही, या आप पढ़ेंगे आप पढ़ेंगे तो कुछ न कुछ अर्थ लगाएंगे और आप कोई ना कोई प्रतिक्रिया देंगे हीं, या नही भी दें तो इसमे कोई अनहोनी नही अपितु ये होनी है।
आपका
Prakash Patel

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