How to succeed सफलता कैसे मिले
सफलता कैसे मिले How to succeed
एक सन्यासी जो अपनी सारी उम्र गहरी अध्यात्म की खोज की, अद्भुत ज्ञान दिए, जब ओ अंतिम सांसें गिन रहे थे, उनका एक शिष्य सेवक लाल ने उनसे आखिरी बार एक सवाल किया और पूछा जाते जाते यह बता दीजिए की आपके गुरु कौन थे,
सन्यासी बोले यह मत पूछो की मेरे गुरु कौन थे, क्यूंकि अब मेरे पास सांसें कम हैं जबाब बहुत लंबा हो जाएगा और तुम समझ ना सकोगे,
सेवक राम बोला गुरुजी छोटे शब्दों मे कुछ तो बता कर जाइए, जानना चाहता है तो सुनो इससे कम शब्दों में ना कह सकूँगा, मै नदी किनारे बैठ कर नदी के शांति से बहती धाराओं को देख रहा था, अपने उलझने सुलझाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, तभी एक प्यासा कुत्ता किनारे पर आ खडा हुआ, वह गर्मी से बेहाल था, और हांफ रहा था, उसे जोरों की प्यास लगी , वह बढ़कर नदी की तरह सर झुकाया और डर कर एक कदम पीछे आ गया और जोर से भौका, पानी पर बनी उसकी परछाई ने भी भौकने की उसी की आवाज सुनाई दी, अब कुत्ते को क्या पता मैं कैसा दिखता हूं, सच मे दूसरा कुत्ता है या मेरी परछाईं है, वह उसे डराने की कोशिश की, प्रतिक्रिया भी वैसा ही मिला, उसने एक कदम आगे आकर डराया और गुर्राया, परछाई ने भी एक कदम आगे आकर डराया और गुर्राया, वह अपनी ही परछाईं से जीतने की नाकाम कोशिश कि, वह बैठ कर इधर उधर देखने लगा, लेकिन प्यास भारी थी, उससे रहा न गया उसने हिम्मत जुटाई और नदी मे कूद गया, जैसे ही नदी के अंदर वाले कुत्ते पर झपटा,और पानी के अंदर का कुत्ता गायब हो गया।
तभी मुझे एक सिख मिली और वह कुत्ता मेरा पहला गुरु बना और जब सारा कायनात हमारा गुरु है तो हम गुरु बनायें किसे, और उन्होंने अपनी अंतिम साँस ली,
जो हमारे अंदर डर है, वह सचमुच एक भरम की दीवार है, अगर हमारी चाह भारी है, ईच्छा शक्ति मजबूत है तो, हमे कूद जाने के बाद डर जैसी भरम की का पता चलेगा कि वह है भी की मेरा भरम है, और जब डर को किनारे मे रखकर जब हम कूदते हैं तो पता चलता है कि यहाँ तो डराने जैसी कोई बात नहीं थी अपितु सफलता हमारी राह देख रही थी,
जो कभी पानी मे नही उतरता वह कभी तैरना नहीं सीख सकता, बिस्तर पर लेट कर हाथ पैर चलाना आसान है, कोई खतरा नहीं है, परंतु जहाँ खतरा नहीं है वहाँ बड़ी सफलता नही है, जितना बड़ा खतरा है उतनी ही बड़ी कामयाबी मिलती है,
एक बार एक रतन भाई एक मछुआरे के पास गया और बोला हमे तैरना सीखा दो, मुझे बड़ी ईच्छा होती है, बहुत ललक है तैरने की।
मछुआरा बोला तो फिर कूद जाओ तालाब मे, रतन बोला कि सीखाओगे तभी तो नदी में उतरूंगा ना, मछुआरे ने कहा कि मै कूदने की बात करता हूं तुम उतरने की बात करते हो, रतन बोला मुझे पहले सीखा तो लो कैसे तैरना है, मुझे पता तो चले अन्यथा मैं डूब गया तो,
मछुआरा बोला अच्छा, वह तालाब से बाहर आया और रतन लाल के हाथ पकड़े और तालाब मे खींचकर लाने लगे, रतन लाल फिसल कर गिर पड़े, और उठ कर घर की तरफ चिल्लाते हुए भागे की जब मैं तैरना सीख जाऊँगा तभी इस तालाब की तरफ आऊंगा,
तो इस तरह कोई तैरना नहीं सीख सकता, अगर कोई सिखाना चाहता है तो उस पर भरोसा करना ही होगा, और डर को किनारे रखकर कूदना ही होगा, अन्यथा आपकी चाहत और ईच्छा मे काफी कमी है, प्यास बढ़ाना होगा, जुनून दिखाना होगा, पागल पंथी करना होगा, तभी जीत मिलेगी।

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