Natural Compound and our life
Natural compound used in our daily life
प्राकृतिक यौगिक का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किया जाना जरूरी क्यों है?
जिसे हम रोज दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, उसमे दो प्रकार के चीज़ शामिल होते हैं
1)-प्राकृतिक
2)-रासायनिक
प्राकृतिक वह होता है, जो हमारे आस-पास शुद्ध रूप में पाया जाता है, या जिसे हम प्रकृति से सीधे प्राप्त करते हैं, जैसे ताजी हवा, ताजा पानी, फल-सब्जी, अनाज, आयुर्वेदिक औषधि आदि।
हमारा शरीर प्राकृतिक है और हर वह घटक जो प्रकृति मे शुद्ध रूप में मौजूद है वह हमारे शरीर तथा स्वास्थ्य के लिए उत्तम है, आजकल फल और सब्जियों में रसायन का प्रयोग किया जाता है जिससे फल या सब्जियों के प्राकृतिक तत्वों में आंशिक बदलाव हो जाता है और यह प्राकृतिक रूप से अशुद्ध हो जाती है। फलों और सब्जियों के स्वाद मे कमी और गुणवत्ता में कमी आ जाती है जिसके कारण हमारे शरीर मे या तो वह बुरा प्रभाव पड़ता है या पोषक तत्व कम होने से उसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है।
उत्पादन को बढ़ाने के लिए आजकल कुछ भी किया जा रहा है, यह सभी को पता है।


यही कारण है कि बीमारियों के गिनती मे नए नए नाम जुड़ते जा रहे हैं, जिससे विज्ञान तरह तरह के उपचार खोजने में लगा हुआ है, और दवाओं के रूप में रसायनों का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ा है, इन दवाओं के प्रयोग से कई प्रकार के साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं और ये दवाएं एक नई बीमारी को जन्म दे रहीं हैं।
पश्चिम के देशों में यह प्रयोग अन्धाधुन्ध किया गया लाभ भी हुआ परन्तु इन प्रयोगों के लंबे समय तक उपयोग करने से जनजीवन मे उसके साइड इफेक्ट देखे जा सकते हैं जो बहुत चिंतित करनी वाला है, अब पश्चिम सभ्यता इसे समझ चुकी है और अब प्रकृति मे वापस लौटने का प्रयास करने लगी है।
परन्तु भारत मे यह उल्टा हो गया है, चूंकि विकसित देशों ने यह अपने विकासशील अवस्था मे सब कुछ झेल चुकी है और इसी क्रम में भारत भी अपनी विकासशील प्रक्रिया मे निरंतर कृत्रिम संसाधनो का प्रयोग कर रही है। हम सबों को इसके घातक परिणाम को भोगने के लिए तैयार होना चाहिए, या अपने पुरानी आयुर्वेद की पद्धति को लेकर चलना चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि जो हम करने जा रहे हैं उसे दोहराया जाना मूर्खता ही होगी भले ही यह हमारी मजबूरी हो।
हमारे शरीर में कई रासायनिक प्रक्रिया होती है और बहुत हद तक संतुलन लाने की कोशिश करता है परंतु इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम अपने भोजन, दवा और हवा सब में रसायन लेने लगें, अगर हम ऐसे ही जीते रहे तो इसके परिणाम हमे भुगतने तय हैं।


हमे क्या करना चाहिए
1)-अगर सम्भव हो तो थोड़ी बहुत सब्जियां घर पर उगाने की व्यवस्था करना चाहिए।
2)-आयुर्वेदिक औषधि वाले पौधों को अपने गार्डन मे जगह देना चाहिए।
3)-सुबह के ताजी हवा मे कुछ समय बिताना चाहिए।
4)-प्रकृति से जुड़कर रहना चाहिए।
5)-रासायनिक दवाओं का प्रयोग कम कर देना चाहिए।
6)-योग और व्यायाम को अपनाना चाहिए।
7)-प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग ज्यादा करना चाहिए।
8)-आयुर्वेद को अपनाना चाहिए।
9)-जड़ी - बूटियों से बने औषधियों का प्रयोग करना चाहिए।
खुद से एक सवाल करें कि क्या काग़ज़ और पलास की बनी गुलाब मे आपको वही एहसास होता है जो असली गुलाब मे होता है

धन्यवाद
आपका दोस्त Prakash Patel

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