Your child's performance is slow, what to do
आप के बच्चे की activities slow है तो क्या करें
Your child's performance is slow, what to do
उसी तरह एक्सरसाइज पर भी यही तरीका काम करता है,
एक्सरसाइज से हमे अनेक फायदे हैं इस पर आगे बढ़ने से पहले हम आप को, बच्चे की activities slow होने के नुकसान के बारे में बताते चलूँ, बच्चे के दिमाग पर इसका कोई खास असर नहीं होगा क्योंकि बच्चा मानसिक रूप से सुदृढ और एकाग्र चित होगा, चीजों को परखने और चीजों को करने की उसका एक अलग ही तरीका होगा, दिमाग काफी व्यवस्थित होगा इसमे कोई संदेह नहीं है।
परन्तु वह चिड़चिड़ा, गुस्सैल और जिद्दी स्वभाव का जरूर हो जाएगा। क्योंकि उसके आस-पास होने वाली सभी गतिविधियाँ उसके मनोरुप नहीं होंगी, चूँकि वह समय पर काम पूरा नहीं कर पाएगा अगर किसी तरह पूरा कर भी लिया तो वह अपनी काफी ऊर्जा खर्च करेगा और थका हुआ महसूस करेगा इस वजह से कभी कभी आलस का अनुभव करेगा और चूंकि बच्चा अपने ऊपर पड़ रहे दबाव को स्वीकार नहीं करेगा नतीज़ा यह होगा कि वह बात बात पर नाराज हो जाए या उसके वाणी के माध्यम से उसकी नाराजगी बाहर परिलक्षित होने लगे, वह अपनी कार्य क्षमता को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क पर ज्यादा जोर दे रहा हो यह भी हो सकता है कि ज्यादा एकान्त मे रहना पसंद करे ।
लेकिन इस दबाव के बावजूद वह अपने आपको शांत रखने का तरीका. उसे पता होता है,
आज के समय की मांग यह है कि हर काम समय पर करना जरूरी होता है, अगर एक ही ट्रेक पर आगे पीछे दो ट्रेन चल रही हों और उनके बीच टाइम का सामंजस्यपूर्ण समन्वय नहीं है तो निश्चित रूप से ट्रेन आपस में भीड़ सकती हैं, समय पर उठना, समय पर खाना, स्कूल जाना, पढ़ना, होमवर्क करना, घर के काम करना या नौकरी करना, हर जगह time का boundation है,
निश्चित रूप से पेरेंट्स के लिए एक चिंता का विषय है
एक्सरसाइज बच्चों की activities को बढ़ा सकता है Exercise कैसी होनी चाहिए जिसमें बच्चे को इंट्रेस्ट भी हो और समय पर करना सीख सके, इसे हम खेल के रूप मे करा सकते हैं, मै आपको नीचे कुछ साधारण activities दे रहे हैं जिन्हें आप आसानी से अपने घर पर प्रयोग कर सकते हैं,
1)- घड़ी पर समय तय करने के बाद दौड़ लगाना
2)- बोतल की ढक्कन खोल और बंद कर स्पीड बढ़ा सकते हैं
3)- रस्सी दौड़
4)- डांस
5)- गाना
6)- लिखने में समय सीमा तय कर सकते हैं
7)- पढ़ने की समय सीमा तय कर के पढ़ना चाहिए
8)- कोई वाद्ययंत्र सीखना
9)- खो - खो, कबड्डी जैसे खेल खेला जाना
10) - सीढ़ियां चढ़ना और उतरना
इसी तरह के अनेक गेम खेल कर खेल खेल मे हम बच्चे की हैबिट बढ़ा सकते हैं, यह तय कर लें कि कितनी समय मे कितनी बार किया जा सकता है, उसी मानक पर बच्चे से कराएं, यह प्रक्रिया धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए, बच्चे के स्पीड के हिसाब से, इस बात का ध्यान रखें कि Video games या mobile games से दूर रखें, इससे बच्चे का मानसिक स्तर तो ऊपर जाएगा पर इसके जस्ट उल्टा शारीरिक स्तर पर गिरावट आएगी, एक बात का parents हमेशा ध्यान रखें कि अन्य बच्चों से अपने बच्चे की तुलना कभी ना करें, बच्चे के मन पर कई तरह के साइड इफेक्ट पनप सकते हैं जो उनके जीवन में घातक हो सकता है, आपका बच्चा अपने आप में सबसे भिन्न है, उसे ज्यादा दबाव कदापि नहीं देनी चाहिए, उन्हें प्यार और आत्म विश्वास की जरूरत होती है,
धन्यवाद


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