कामयाबी की कहानी story of success

कामयाबी की कहानी
Story of success

 एक बार एक शहर में एक बेरोजगर रहता था, वैसे तो इस देश में बेरोजगरों की कोई कमी नहीं है परन्तु, हम उस बेरोजगर की बात करेंगे जो अपने काम का है, उसने बहुत कोशिश की परन्तु वह अच्छी नौकरी नहीं ढूंढ़ पाया, थक हारकर वह झिल के किनारे आकर बैठ गया, वह अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित था, वह झील के किनारे पर लोगों को मछली पकड़ते देख रहा था , उसके दिमाग में भी आइडियास का सूत्रपात होने लगा, उसने सोचा कि अगर वह मछली पकड़ कर बाजार में बेच दे तो अच्छी आय की जा सकती है जो हमारी बेरो़गारी दूर कर सकता है, और मै कीसी दिन अमीर बन सकता हूं, नौकरी तो आखिर नौकरी ही होती है , मै यहां अपने नए धंधे का मालिक भी बन सकता हूं, मुझे क़िसी कि आदेश का पालन करने की कोई जरूरत नहीं है।



   लेकिन उस गरीब बेरो़गार के पास मछली पकड़ने के उपयुक्त साधन नहीं थे , ना नेट था ना नाव थी ना और कोई साधन , पर उसकी इच्छा शक्ति काफी मजबूत हो रही थी कि बस अब हमें किसी तरह इस काम को करना ही है, वह मछली फसाने का कांटा ले आया , एक लंबे डंडे से बांधकर, चारा लगाकर झिल में फेकता और मछली के फसने का इंतजार करता रहता परन्तु वह बहुत कम मछलियां ही पकड़ पाता था, कभी कभी तो उसे खाली हाथ ही वापस लौट जाना होता था, कांटा फेक्कर वह कभी कभी गहरी सोच में डूब जाता, और नए तरीके खोजने में लगा रहता, पर उसकी गरीबी ने उसके हाथ पांव इस तरह बांध रखे थे कि उसके सारे आइडियास बेकार ही होते चले जा रहे थे, एक दिन उसने फैसला किया कि उसे जाल बनाना ही होगा, नाव बनानी ही होगी, अगले ही दिन उसने, जाल बुनने का धागा लिया और तरकीब सीखी, और नेट बुनना प्रारंभ किया, काफी समय लगा पर वह जाल बनाने में कामयाब रहा, अब उसे एक नाव की जरूरत थी, जिसमें काफी धन की आवश्यकता होती, उसने सोचा हम अब ज्यादा मछलियां पकड़ सकते हैं, कम से कम उस कांटे से तो अधिक ही, और धीरे धीरे धन जमा करके मै नाव भी खरीद सकता हूं, उसने वैसा ही किया, एक दिन वह नाव का मालिक हो चुका था , वह हर रोज अधिक मछलियां पकड़ता और बेचता , अब वह काफी धन अर्जित कर चुका था, वह बहुत खुश था क्योंकि जो वह करना चाहता था उसमे सफल था,


      एक एक रुपया जोड़कर कोई मजदूर कभी अमीर नहीं बन सकता, बस वह रोजी रोटी कमा सकता है किसी तरह अपने परिवार का पेट भरने में सफल हो सकता है परंतु वह कामयाब नहीं हो सकता, कामयाब होना है तो मालिक बनना होगा चाहे वह सुरूआत कहीं से भी करे, एक नौकर और एक मालिक की सोच अलग होती है , चाहे वह सोच किसी रेस्तरां चलाने वाले की हो या किसी बड़े बिजनेस मैन की हो, वह निश्चित ही एक नौकर की भांति नहीं सोचते, धन कमाने का उनका नजरिया अलग ही होगा।

      अमीर बनने के लिए हमें ऐसे काम करने होंगे जहां लोग संगठन बनाकर काम करते हैं , जहां नेटवर्क बनाकर काम किया जाता है, वहां सफलता मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, कहा जाता है अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, यह कोई कहावत ही नहीं अपितु सत्य है जो जमीन पर लागू होती है,

समय लगे तो लगने दो, धन लगे तो लगने दो, लोग हंसे तो हसने दो, लेकिन जिस दिन आपका नेट वर्क बन कर तैयार होगा , तुम्हारे सारे सपने साकार होने लगेंगे।

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