कुछ बनना है तो इंसान बन

कुछ बनना है तो इंसान बन


न हिन्दू बन ना मुसलमान बन

बन सको तो इंसानबन


इंसानियत को तू मत भूल पगले

पैदा हुए थे तो क्या थे बदले

कहां है तू खोया,

नींद से आज जगले


कुछ बनना है तो इंसान बन

न अग्नि बन न तूफान बन

इंसानियत की पहचान बन 


क्या है तेरे पास जो दे सकेगा 

क्या ना ले पाओ जो ओ दे सकेगा
क्यू लड़ते हो नाम पे उसके

उस आ तमा का भी दिल दुखेगा


कुछ बनना है तो इंसान बन
ना गीता बन ना कुरान बन


सीधा साधा इंसान बन


उसकी नजर में सब जीव जन्तु

हमने ही लगाए हैं किन्तु परन्तु

न पानी है तेरी न हवा है तेरा 

न साम है तेरी न तेरा सवेरा
किस चक्कर में हो तुम यारो

ना जीत तेरी ना हार तेरा


कुछ बनना है तो इंसान बन

ना हैवान बन ना सैतान बन

ना कोई भगवान बन


देशों में बांटा धर्मो में  बांटा

ऊंच नीच के कर्मो में बांटा
देखा करो कभी  सोंच कर तुम

अभी तक हुआ  है किसका घाटा
कुछ बनना है तो इंसान बन

न हिंदू बन ना मुसलमान बन

बन सको तो इंसान बन

Prakash Patel

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