मानसिक अवस्थाएं Mentally situations
Mentally situations
ऐसा सोच जो मस्तिष्क की क्षमता को नष्ट कर दे
ऐसा क्या है जो इंसान को बदल देता है, यहां समझने वाली बात यह है कि, एक मस्तिष्क जो हमारे बॉडी को कन्ट्रोल करता है और वही मस्तिष्क हमारे मस्तिष्क को भी कंट्रोल करने का काम करता है,चूंकि लेख का शीर्षक मस्तिष्क और उसके सोच पर है तो हमे पहले मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को कम शब्दों में समझने की जरूरत पहले होगी।हमारे शरीर मे हो रहे रासायनिक प्रक्रिया को तो मस्तिष्क सीधे तौर पर ही निर्देशित करता है परन्तु मस्तिष्क को जब कंट्रोल करना होता है तो यह कई चरणों मे काम करता है,इस प्रक्रिया मे माइंड अपने ज्ञानेन्द्रियों की सहायता लेता है। नाक की सहायता सूंघने के लिए, नेत्र की सहायता देखने के लिए, जीभ की सहायता टेस्ट के लिए, त्वचा की सहायता गर्मी, ठंडी के साथ वस्तु की भौतिक प्रकृति के लिए, अब हम विज्ञान की सहायता भी लेने लगे हैं, जहाँ हमारे प्रयोग से हमे और भी गहन अध्ययन का पता चलता है,
मस्तिष्क अब करता यह है कि सारे इन्द्रियों से लिए गए आंकड़ों के आधार पर हमारे मन के द्वारा एक अस्थाई डेटा बनाता है, और जो तथ्य एवं तर्क के आधार पर अपने अंतर्मन को भेज दिये जाते हैं। अपने अंतर्मन को इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि मन उसके अंतर्मन मे क्या भेज रहा है, जो भी वहां भेज जाता है, अंतर्मन के हिसाब से 100%सही माना जाता है, चूंकि माइंड खुद ही एडमिनिस्ट्रेशन का काम करता है इसलिए उसके पास ए अधिकार सुरक्षित रहता है कि जब वह चाहे वह पहले जमा किए हुए, सूचनाओं को बदलकर नई सूचनाएं डालकर उन्हें फिर से नई सोच तथा उसके जीवन शैली मे बदलाव सकता है।
कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि, मस्तिष्क बिना कोई आंकड़े बनाए भी अपने अंतर्मन मे कुछ ऐसे सूचनाएँ एकत्रित कर लेता है, जिसकी कोई ठोस आधार नहीं होते, ऐसा कब होता है? और क्यूँ होता है?
ऐसा तब होता है जब सारे इंद्रिय एक साथ सक्रिय हो जाती हैं, और एक ही तरह की सूचनाएं देने लगते हैं मस्तिष्क को यह जबरन मानना होता है, ओ इसलिये कि उनके द्वारा भेजे गए संदेश इतने ऊंचे तीव्रता के होते हैं कि उसमे ग्राफिक करना mind को अनुचित लगता है, ऐसे आंकड़े या तो सही या गलत कुछ भी हो सकता है, जैसा कि पहले बताया अपने अंतर्मन को मिले सूचना मे हेराफेरी करने का अधिकार नहीं होता, यह काम तार्किक मस्तिष्क का होता है जो सूचनाओं को ग्राफिक्स करने का काम करता है अपनी जमा किए हुए सूचनाओं के आधार पर रिजल्ट्स बनाकर अंतर्मन को भेजना होता है।
तो जब सूचनाएं एक साथ सभी तरफ से एक ही तीव्रता से आती है तो इसका असर हृदय मे हो रही स्पंदन से अनुभव किया जा सकता है, यहाँ इस प्रक्रिया मे हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, बॉडी से लेकर माइंड तक सबको प्रभावित करता है, इसे ही दिल से लिया हुआ फैसला कहा जाता है आमतौर की भाषा मे, कोई युवा लड़की किसी लड़के को देखे या कोई युवा लड़का कीसी युवा लड़की को देखे तो अक्सर ऐसा ही होता है, पर यह मस्तिष्क कई मामलों में ऐसा बर्ताव करता है दूसरे शब्दों में इसे इमोशनल होना भी कह सकते हैं, या इमोशंस मे लिए हुए फैसले भी कह सकते हैं।
इस लेख को लिखने का मुख्य कारण हमे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बताना नही अपितु, मस्तिष्क मे पैदा होने वाली उस ख़तरनाक वायरस से है, जो मस्तिष्क की सोचने वाली तार्किक मस्तिष्क को ब्लॉक कर देती है, और मनुष्य का दिमाग किसी एक ही दिशा में चलता चला जाता है, वह तर्कों को मानने से इंकार करता है और जो सोच उसकी दिमाग ने अंतर्मन मे भेज दिया होता है वह उसे बदलने के लिए कभी भी तैयार नहीं होता, यहां सबसे खतरनाक बात यह है कि यह वायरस इंसान को गलत दिशा में ले जा रहा होता है पर इंसान को लगता है कि सारी दुनिया उसके बारे मे क्या सोचती है उसे कोइ फर्क़ नहीं पड़ता वह जो कर रहा है वहीं 100 %सही कर रहा है।
किसी व्यक्ति का आतंकवादी बन जाना,
किसी व्यक्ति का पागलपन जैसी हरकतें करना,
अपने परायों की परवाह ना करना,
लाइफ में उठा पटक की अधिकता होना,
उत्साह की सीमा तय ना कर पाना,
दूसरों की बातें सही ना लगना,
हमेशा ही संदेह का नजरिया रखना,
कुंठित रहना,
गुस्से की अधिकता होना,
सोच का संकुचित हो जाना,
नफा नुकसान की परवाह ना करना,
बिना दूरदर्शिता रखे कार्य करना,
कमाल की बात तो यह है कि ऐसे लोगों मे इतने सारे प्रॉब्लम होते हुए भी समान्य जीवन जीते हैं, देखने मे समान्य, काम करने मे समान्य, रोमांस मे समान्य, केवल कुछ ही मामलों मे ही उचाट होते हैं,
अगर किसी भी पाठक को ऐसा महसुस होता है तो उन्हें योग करना अति उत्तम है, ध्यान करना अति आवश्यक है, मस्तिष्क के अंदर जाने का एक ही रास्ता है ध्यान, ध्यान करने से मस्तिष्क के ब्रम्हांड के कपाट खुल जाते हैं और, योगी चाहे तो, अंतर्मन मे जो वायरस है उसे वहां से हटा कर माइंड के सारे रास्तों को आपस में जोड़ सकता हैं, जब सारे रास्ते आपस में जुड़े होंगे तो मस्तिष्क सोचने औऱ तर्क करने लगेगा और इन्सान की सोच बदल जाएगी।
धन्यवाद
आपका
Prakash Patel
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