तीन भावना जिसके अंदर है, वह बादशाह है । भरोसा, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा

     तीन भावना जिसके अंदर है 
     वह बादशाह है 
   भरोसा, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा 
Three spirit inside

     He is king

   Trust, confidence and honesty

भरोसा - :-
 भरोसा नहीं तो कुछ भी नहीं, भरोसा प्रकृति का आधार है, भरोसा नहीं तो कुछ भी नहीं, " भरोसा के दो आयाम होते हैं, एक आपके अंदर की ओर दूसरी आपके बाहर की ओर, जो आपके अंदर जाती है ओ आपका behaviour बनकर बाहर आती है,और जो आयाम बाहर की ओर जाती है ओ परिवेश की behaviour बनकर आपके अंदर आती है। " जिसके अनुसार आप अपनी जीवन-शैली तय करते हैं, जीवन शैली तय करती है तो स्वाभाविक है आप उसी के अनुरूप कुछ खोते जा रहे होते हैं और कुछ पाते जा रहे होते हैं। अगर आपके अंदर भरोसा शून्य है तो आपके अंदर बहुत से संबंधित भावनाओं पर इसका नकारात्मक असर होता है, भावनाओं का आधार क्षीण होने के कारण उनमे संकुचन होने लगता है, जीवन ऊर्जा का अभाव होने लगता है। इसके विपरित अगर अधिक भरोसा है तो, जीवन कार्यशैली अलग होगी पर परिणाम लगभग समान और दुखदाई होंगे। तो भरोसा का सही माप क्या है, यह आपके परिवेश, आपके आसपास के लोग, आपका नजरिया, आपकी शिक्षा और भी बहुत कुछ जिम्मेदार है वह आपकों तय करना है कि कितना करना है भरोसा खुद पर, क्यूकी भरोसा ही तय करेगा कि आप कितना पाते हैं कितना खोते हैं।
Three spirit inside He is king   Title Trust, confidence and honesty

         "भरोसे पर दुनिया टिकी है" ऐसी कहावत आपने जरूर सुनी होगी, कहावत किसी एक व्यक्ति की देन नहीं अपितु यह हमारे परिवेश का शाब्दिक अर्थ होता है। तो इस कथन की सत्यता यह है कि हमे खुद पर भरोसा करना सीखना चाहिए क्यूकी खुद पर भरोसा करने से ही आत्मविश्वास जन्म लेता है और आत्मविश्वास जिसके अंदर आ जाती है उसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और जब क्षमता बढ़ जाती है, जीवन में बड़े बड़े परिवर्तन दे देती है और आप अपने आपको बुलंदियों पर पाते हैं।

आत्मविश्वास - :-
भरोसा नहीं तो आत्मविश्वास नहीं। इसके बारे में मैंने पहले ही चर्चा की है, भरोसे से आत्मविश्वास जन्म लेता है, ए दोनों सिक्के के दो पहलू के समान है भरोसा और आत्मविश्वास दोनों एक साथ होना स्वाभाविक है।

कर्तव्यनिष्ठा - :- 
"आवश्यकता अविष्कार की जननी है" ए कहावत आपने जरूर सुनी होगी, अविष्कार शब्द, कर्तव्यनिष्ठा से ही निकल कर अस्तित्व मे आया है, बिना कार्य को निष्ठा के साथ किए, आविष्कार हो ही नहीं सकते।
                   तात्पर्य यह है कि अगर आप भरोसा करें, खुद पर आत्मविश्वास रखें और अपने हर काम लगन से करें तो आपको दुनिया की कोई भी ताकत आपकी गति नहीं रोक सकती है
आपका मित्र
Prakash Patel

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