समय की वैज्ञानिक विश्लेषण

समय की वैज्ञानिक विश्लेषण 


जहाँ रौशनी और अंधेरा मिलते हैं वहां एक दीवार बन जाती है वही दीवार समय को दर्शाता है
हमने कभी समय को ठीक तरह से समझने की कभी कोशिश ही नहीं की,


मै आपको समझाने की कोशिश करूंगा आप समझना चाहते हों तो कृपा कर के ए कल्पना करने की कोशिश करें की दिन, तिथि, साल, महीना, चाँद, तारे, सूर्य कुछ भी नहीं हैं तो आप अपने को पायेगे कि आप काले अंधेरे मे हैं आप खुद को भी देख नहीं पा रहे हो, अब अपनी मेमोरी को साफ कर दो जैसे कि आपने कभी उजाले मे सिरकत किया ही ना हो, दूसरी बात यह भी अपने दिमाग मे रखें सब कुछ अचल है, क्युकी जो भी चल रहा है उनका केंद्र सूर्य है और तारें हैं, अब इन सबके बिना कायनात कैसी मालूम होगी आप कल्पना करेंगे कि अब जो भी है  सब अलग ही है, आप कहां हैं आपको पता नहीं होगा आप विरान ग्रह को महसूस करेंगे इतनी भयानक ठंड है की सबकुछ जम गई है धरती पर जीवन है तो सूर्य  की वजह से है, सूर्य से निकलने वाली किरणों मे इस संसार मे जीवन पनपाने वाली ऊर्जा का संचार होता है अब जब सूर्य तारे ही नहीं हैं तो, तो आप मान सकते हैं कि समय रुक चुका है कुछ भी चलायमान नही है सब कुछ स्थिर हो गया है, अब आप असमय मे आ चुके हैं जहा केवल अंधेरे का साम्राज्य है जहां समय रुक गया है सब कुछ फ्रीज़ मोड पे आ चुका है, तो इसलिए आप यह भी मान ले की अंधेरे का कोई भूत और भविष्य नहीं होता और इनके स्रोत ब्लेक होल हैं इसके दूसरी तरफ जब हमारे पास जब सारे चमकदार आकाशीय पिंड होते हैं उनका प्रकाश पुंज हमारे कायनात को रौशन कर देता है सारे कायनात मे प्राण देने वाली ऊर्जा का संचार हो रहा है बस वैसा ही जैसे हम अपने वर्तमान को महसूस कर रहे होते हैं, अब हम चलायमान समय मे आ चुके हैं, और इनके श्रोत तारे हैं, अब तो आप समय और असमय मे अन्तर समझ गए होंगे, अब हम समय की चाल का आकलन कैसे करेंगे


तो आइए हम एक प्रयोग करके समझने की कोशिश करते हैं और आकलन करने की कोशिश करते हैं
1. एक ऐसा पर्दा लेना है जो बहुत ही पतला  और प्रकाश उसके पार 1%भी न जा सके
प्रयोग -1 - एक अपारदर्शी गोलाकार ट्यूब लेंगे जो पूर्ण परवर्ती दीवार की बनी हो अब हम इसमें वैसे चमकदार पूर्ण परवर्ती पतली पर्दे की (ए पर्दा किसी धातु की भी हो सकती है) दीवार लगाएगे अब उस ट्यूब मे नियत प्रकाश पुंज डालेंगे अब उस पर्दे मे निहित हुई अंतिम स्थिर उष्मिय ऊर्जा को सबसे छोटी इकाई से नाप लेंगे, अब निहित ऊर्जा को उत्सर्जित उष्मिय ऊर्जा से घटाकर नोट कर लेंगे
प्रयोग - 2- एक अपारदर्शी गोलाकार ट्यूब लेगे जिसकी सतह पूर्ण अपरीवर्ती होनी चाहिए, वैसे ही पूर्ण अपरीवर्ती उतनी ही पतली पर्दा या दीवार लगाएंगे (ए पर्दा या दीवार किसी धातु की हो सकती है)अब पर्दे की निहित उष्मिय ऊर्जा को  उत्सर्जित उष्मिय ऊर्जा से घटाकर नोट कर लेंगे
प्रयोग - 3-  प्रयोग एक की पाठ्य अंक एवं प्रयोग 2 पाठ्य अंक को जोड़ देंगे अब जो कंबाइंड पाठ्य अंक आएगा उसे ताप के सबसे छोटी इकाइयों में बांट लेंगे उसका 2 से भाग कर देंगे चूकि समय दो आयाम मे चलती है
इसलिए
यहां जो परिणाम निकल कर आता है वह निम्न है
चमकदार आयाम मे प्राप्त पाठ्य अंक +काले आयाम मे प्राप्त पाठ्य अंक/2 =समय की निश्चित केन्द्र बिन्दु
 ए बिन्दु प्रकाश की उत्सर्जित ऊर्जा की आधी  होगी क्योंकि उतनी ही ऊर्जा समय को असमय मे चलने मे खर्च होगी या कह सकते हैं कि ब्लैक से निकली फ्रीज ऊर्जा मे खपत हो जाएगी। 



चूंकि प्रकाश श्रोत केंद्र बहु आयामी होता है तो ब्लैक श्रोत भी बहुआयामी होगा मतलब 1:1
दोस्तों इस लेख का वैज्ञानिक विश्लेषण
और प्रयोग आपको आगे की लेख मे जरुर दूंगा। संभव है की मेरे आज के लेख मे संशोधन मै फिर से करुं।
 मेरे इस सिद्धांत से आप सब की राय और विचार का मै दिल से स्वागत करता हूं। मेरे इस  सिद्धांत मे कुछ कमी हो सकती है जिसे मै अगली बार के लेख में दूर करुंगा।
आपका धन्यवाद
Prakash Patel
Blowlifer.blogspot.com 


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