वजह तो यह है यार इन परेशानियों की

परेशानियां और उलझने क्यू आती हैं 

वजह और उनके निराकरण 

                संसार मे ऐसा कोई इंसान नहीं जिन्हे परेशानियां और उलझने नहीं आती हैं, ए उलझने और परेशानियां इंसान के तरक्की मे बहुत बड़ी बाधा लेकर आती हैं और जब तक ए रहती हैं तब तक इंसान अपने मंजिल तक पहुचने मे अनेक प्रकार के अरचनो का सामना करता है और अंत मे हम थक हार कर बैठ जाते हैं कि बस हो गया ए काम हमारे बस का नहीं है और वह बीच मे ही अपने आप को रोक देता है और उसकी मंजिल अधूरी रह जाती है  ।


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सफलता के 9सुत्र 

                    इन परेशानियों की कोई ना कोई वजह होती है जिन्हे हम पहचान कर दूर कर लिया जाए तो मेरा विस्वास ए कहता है कि हमारे परेशानीयों को कम किया जा सकता है। और अपनी तरक्की के रास्ते को साफ करने मे बहुत आसानी हो सकती है। 
                मैंने ऐसे 10 कारण बताऊंगा जिन्हे आप अपने लाइफ मे सुधार कर के अपना रास्ता आसान बना सकते हैं और साथ ही आपके व्यक्तित्व में जो निखार आएगा ओ आपको बोनस के रूप मे मिलेगा

1. क्रोध

   क्रोध या गुस्सा ऐसा मनोविकार है जो मनुष्य को पिछले स्तर पर ले जाता है, आप गुस्से को भली भांति जानते हैं बचपन से ही यह हमारे साथ रहता है  हम चाहकर भी इसे अपने दिमाग से अलग नहीं कर सकते, मै ऐसा भी नहीं कह सकता हूं कि आप को कभी भी गुस्सा नहीं करनी चाहिए जहाँ उपयुक्त है वहां हमे गुस्सा करना चाहिए इससे हमे कई तरह के मामले में फायदा हो सकती है पर जहा जरूरी ना हो वहा भी हम गुस्सा करते रहते हैं  और सबसे बड़ी बात है कि हमे पता भी नहीं होता कि हमने बेवजह ही गुस्सा आया,

                       अब आपको इससे होने वाले नुकसान के बारे मे बताने की कोशिश करता हूँ, कभी घर के किसी सदस्य पर तो कभी अपने काम करने वालों पर गुस्सा करते हैं  नुकसान यह है कि आपकी छवि खराब हो जाती है और जो आपके गुस्से का शिकार हुआ है वो या तो काम सही करेगा या जानबूझ कर आपका काम बिगाड़ता चला जाएगा और अपने साथियों को भी आपके बारे मे गलत सलाह देता चला जाएगा,।

                    दूसरा यह कि आपके सेहत पर इसका बुरा असर पड़ता है  भूख ना लगना,  चिड़चिड़ापन, बेचैनी, हाई ब्लडप्रेशर, शुगर, नींद ना आना आदि कई प्रकार के रोग घेर लेती हैं तब जन्म लेती हैं परेशानियां, हम क्रोध को कम कर के भी आने वाले समय में परेशानियों को दूर करने में सफल हो सकते हैं।
2. लोभ
              हां दोस्तों लोभ और लालच एक ऐसी मनोविकार है जो किसी दलदल से कम नहीं
एक कहावत है
            मक्खी गुड मे गड़ी रहे,पंख रहे लीपटाय।
           हाथ मले सिर धूने लालच बुरी बला ्‍य। ।

   गुड़ चिपचिपा हो और कोई मक्खी लालच मे आकर बैठ जाए तो उसका क्या हाल होगा वही इस वाक्य मे बताया गया है
                          वैसा ही हाल इंसानो का भी होता है, जो मन की चाहत हो ओ मिल जाए तो किसे अच्छा नहीं लगता, चाहे वह अपना न हो किसी और की हो पर बहुत ही अच्छा लगता है,। भारत की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल भी लालच का हि परिणाम है आपको भी पता है और हमे भी मालूम है
                     झूठ, चोरी,  धोखेबाजी, घूसखोरी, हेराफेरी आदि कई तरह के दलदल मे धकेलता जाता है, इंसान धर्म का रास्ता भटक जाता है, फिर पैदा होती है बड़ी बड़ी परेशानियां,इस मनोविकार का त्याग कर दिया जाए तो सामभवतः हम आने वाले समय में परेशानियों को दूर करने मे सफल हो सकते हैं,
3. मोह
       दोस्तों मोह से मै एक अर्थ लेकर चलता हू जिसका मतलब है पाने की चाह  जब पाने की चाह प्रबल हो जाती है तो कभी कभी इंसान ओ रास्ता अख्तियार करने लगता है जो जायज नहीं होती, जैसे किसी को किसी से प्यार हो जाए और अपने प्यार को पाने के लिए वह दिखावा, झूठ,आदि का सहारा लिया जाए तो भी वह कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है,
इन परेशानियों की कोई ना कोई वजह होती है जिन्हे हम पहचान कर दूर केर लिया जाए तो मेरा विस्वास ए कहता है कि हम जरूर  परेशानीयों को कम किया जा सकता है। और अपनी तरक्की के रास्ते को साफ करने मे बहुत आसानी होगी।blowlifer.blogspot.com

    कभी कभी क्या होता है कि मोह माया के चक्कर में लोग अपने मुख्य मार्ग से भटक जाता है जिससे वह कभी मंजिल तक नहीं पहुंच पाता,तो आप भी बेकार की मोह में फसकर अपनी उलझनों को बढ़ाने से बच सकते हैं ।
4. भय
     भय वो मनोविकार है जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकती रहती है  डर के मारे हम आगे जाने से कतराते रहते हैं किसी ने कहा है ,डर के आगे जीत है। 
भय के साथ उठाया गया कदम भी हमे सफलता नही दिला सकती अगर हमे सफलता पानी है तो हमे डर नामक मनोविकारों से जितना होगा, भय को दरकिनार करना होगा, इसे दूर करने का सही तरीका है कि हमे अपना आत्मविश्वास बनाए रहना चाहिए, आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए हमें निरन्तर सीखना शुरू कर देना चाहिए, किताब पढना इसका एक अच्छा विकल्प हो सकता है

      तो दोस्तो डर से आगे जाकर भी हम मन्जिल तक पहुंच सकते हैं आप खुद से ही वादा किजिये की अब हमें किसी बात का डर नही
              मुझे पुरा भरोसा है कि आप अपने अपने मन्जिल तक पहुंचने में सफल रहेगे।
5. ईर्ष्या
       ईर्ष्या अथार्त नफरत यह एक बहुत ही खतरनाक मनोविकार है,
        नफरतों की दीवार बनाकर
       उपर से प्यार दिखाकर,
        दुश्मन अपने पैदा ना कर
      किसी को निचा दिखाकर।

        अगर आप भी कीसी से ऎसा भाव रखते हैं तो संभल जाइए आप किसी से नफरत कर के अपनी तरक्की की राह आसान नहीं अपितु मुश्किल पैदा कर रहे हैं,
ऐसे दुश्मन बना रहे हैं जो आपको आगे से नहीं पिछे से वार करने के लिए तैयार हैं  बस एक बार उन्हें सही मौका मिल जाए,
           आप किसी से बैर कर के अपने मुसीबत को ना बढ़ाए नही तो आप सफलता नहीं प्राप्त कर सकते
किसी ट्रक के पिछे लिखा आपने भी कभी पढ़ होगा, ,, जलो मत बराबरी करो,,
6. अहंकार
          अहंकार का सीधा संबंध है घमंड जब किसी को ये बीमारी होती है तो पता भी नही चलता, वह अंधा हो जाता है,ये तब होता है जब इंसान अपने आपको अन्य लोगों से ऊंचा समझने लगता है और उसे कब अहंकार रूपी मनोविकार आ जाता है समझ न्ही पाता या समझना जरूरी नही समझता,, इसके फलस्वरूप होता यह है कि आत्मसम्मान घटने लगता है,

 और इस बात से वह अनजान रहता है, उससे मिलने वाले लोग चापलूसी करने लगते हैं,, और वो समझता है कि यह तो मेरा सम्मान है, अग्यात दुश्मन पैदा हो जाते हैं, और बना बनाया सपनों का महल में दरार आना शुरू हो जाता है, उसका एम्पायर अब पतन हो जाता है पता ही नहीं चलता
तो दोस्तों आप भी इस अहंकार रूपी महामारी से दूरी  बनाकर रखें तो अच्छा है।

7. व्यभिचार
               इस शब्द मे ही इसका बहूत बड़ा अर्थ छुपा है मन मे अनियंत्रित रुप से आने वाले विचार, जो छडिक सुखों को पाने के लिए इन्सान इस भयानक मनोविकारों को हवा देता है और कई तरह के परेशानी को पैदा करता रहता है

इस विशय पर मै ज्यादा न्ही लिखना चाहता लिखने लग जाऊ तो कई पेज भर जाएगा, आप समझदार हैं इससे हमेशा से ही बचे रहे नही तो ये शुरू में स्वर्ग बाद में नर्क की ओर ले जाता है
8. असावधानी
किसी काम को मन लगाकर ना करना ही असावधानी है भूल से भी कोई भूल होना ही असावधानी है, करना कुछ और सोचना कुछ ही असावधानी है, होता क्या है कि जब हम एक चित्त होकर काम नहीं करते तो रिजल्ट्स मे जो कमी आती है उसके वजह से हमे ए एहसास होता है कि हमने कोई ना कोई गलती की थी, हालांकि अपको पता उस टाइम में न्ही चलेगा जब आप गलतियां कर रहे होते हैं
                लापरवाही से किया गए कार्य मे ही इस टाइप की गलतियों को जन्म देती हैं बाद मे परेशानी की सबब बन जाती है, लापरवाही के गाड़ी चलाना दुर्घटना का कारण बनता है, सजग रह कर अपने हर काम किया करें तो आप भी निश्चित ही परेशानियों और उलझाने वाले नतीजों से बच कर अपना मार्ग बना सकते हैं,
 सावधानी बरतने वाली टूल्स का उपयोग अपने सेफ्टी के लिए हमेशा किया किजिये। कही सफर के दौरान अपने जरूरी सामान साथ रखिए, गाड़ी उचित स्पीड से ही चलाए, बिजली से संबंधित कार्यो मे आतरिकत सावधानी बरते,
9. झूठ
          झूठ से हमेशा बचना चाहिए हम सोचते हैं कि झूठ बोल कर हम अपना काम निकाल लेंगे हा जरूर काम निकाल सकते हैं पर आप इसके परिणाम के बारे मे भी जरा सोच विचार कर लेना चाहिए, झूठ के बुनियाद पर कोई भी रिस्ते न्ही टिकते   झूठे वादे दूसरों को दुख देता है साथ ही अपने आपको भी अपनी नज़र से गिरा देता है

          एक झूठ को दबाने के लिए छुपाने के लिए एक के बाद एक झूठ इंसान बोलता चला जाता है वह झूठ की दालदल मे दबता चला जाता है अब ओ वहा पहुच जाता है जहां से निकलने का कोई रास्ता नजर न्ही आता
         सच का साथ अगर इंसान की जिंदगी मे बना रहे तो इंसान निर्भीक होकर अपनी राह पर चलता जाता है, उसे किसी बात का भय नहीं रह जाता, कहते है कि सौ झूठ पर एक सच भारी होता है इसलिए हमे अगर अपने आपकी भलाई चाहिए तो भलाई इसी मे है कि सत्य को हमेशा अपनी आभूषणों की तरह प्यार से धारण करे।
10. वचन
   वचन का अर्थ वादा भी होता है जरूर वादा करें तो निभाये भी
पर वचन का मतलब मै वाणी से लेना चाहता हू
  ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय
  औरण को शितल करै आपो शितल होय
वचन ऐसे बोलने चाहिये कि सामने वाला सुन कर आपका दीवाना बन जाए
ऐसा न्ही बोलने चाहिये कि ओ पागल हो जाए और आपको काट खाए उसे बुरी लगे, इंसान अपनी बोली भाषा से महान बन सकता है ओछी हरकतों  से कभी महान न्ही बन सकते, गंदी भाषा, गाली आदि का प्रयोग ना करे आदर सूचक शब्दों का प्रयोग किया करे,. किसी का अपमान न किया करें आप हमेशा से आगे बढ़ते रहेंगे परेशानियाँ आपके लाइफ से जाती रहेंगीं


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कॉमेंट भी किजियेगा अगर कोई सुझाव देना चाहें तो आपका स्वागत है
धन्यवाद
आपका

Prakash Patel
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