क्या अति आत्मविश्वास एक बीमारी है?
Is overconfidence a disease?
जहाँ तक विश्वास और आत्मविश्वास की बात है वहाँ तक तो लोग समझते हैं कि ठीक है लेकिन जहाँ अति आत्मविश्वास की बात होती है लोग यहां सोच लेते हैं कि उसे तो अति आत्मविश्वास हो गया है या कहते हैं कि फलां को
overconfidence हो गया high confident हो गया अब ओ गया काम से इसका मतलब यह है कि जिस व्यक्ति को अति आत्मविश्वास हुआ है उसे सच का ग्यान नही है उसने अनजाने मे ऐसा फैसला लिया है और जब उसे सच का ग्यान होगा तब उसे अपने अति आत्मविश्वास होने का पता चलेगा और इस तरह की गलती से काफी शर्मिंदा होगा।
overconfidence हो गया high confident हो गया अब ओ गया काम से इसका मतलब यह है कि जिस व्यक्ति को अति आत्मविश्वास हुआ है उसे सच का ग्यान नही है उसने अनजाने मे ऐसा फैसला लिया है और जब उसे सच का ग्यान होगा तब उसे अपने अति आत्मविश्वास होने का पता चलेगा और इस तरह की गलती से काफी शर्मिंदा होगा।
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Is overconfidence a disease |
' इस विषय पर आपको बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी आप खुद से निश्चय करें कि आप बारीकी से समझने की कोशिश करेंगे'
अति आत्मविश्वास कैसे होता है निम्न बिंदुओं पर गौर करें
1. या तो व्यक्ति की दूर की नजर कमजोर है
2. या तो व्यक्ति की सुनने की क्षमता कम है
3. या तो व्यक्ति बुद्धि से थोड़ा कमजोर है
4. या तो व्यक्ति बिना गंभीरता से सोचे ही फैसला लेता है
5. या तो व्यक्ति पूरा सुनने से पहले ही फैसला लेता है
6. या तो व्यक्ति बिना ठीक से देखे ही फैसला ले लेता है
7. या तो व्यक्ति के ऊपर पास जानकारीयों की कमी है
8. या तो व्यक्ति को भविष्य का अनुमान लगाने की क्षमता अच्छी नहीं है
9. या उपरोक्त 1 और 2 दोनों है
इन बिंदुओं मे 1 से 3 शारीरिक और मानसिक कमजोरी है इस तरह के शारीरिक एवं मानसिक रूप से बीमार लोगों को संभवत: अति आत्मविश्वास होना कोई बड़ी बात नही है यह आम तौर पर बहुत से लागों के साथ होता होगा, ऐसे लोगों से कभी भी उनके भावनाओ को ठेस नही पहुंचाना चाहिए, हा एक बात है अगर आप लोगों मे से किसी मे भी इस तरह की कोई सारीरिक रूप से कमजोर मानता है तो अच्छी तरह से जाच परख कर और सोच समझ कर ही फैसला करना चाहिये या किसी चीज पर विस्वास करना चाहिए,।
" कुछ लोग इस प्रकार के भी होते हैं कि उनका आदत होता है हमेशा की तरह बिना सोचे समझे बिना जाने बुझे बिना जाने परखे फैसला लेने की ओ अधिकतर धोखा खाते हैं"
अब तो आप लगभग अनुमान लगा ही लिए होंगे कि अति आत्मविश्वास कोई बीमारी नही हैं,आप आगे पढ़िए कि जो बीमारी नही होता ओ किसी बीमारी से भी कम नही होता।
अब बात करते है 4,5 और 6 नंबर की ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक है बहुत से लोग क्या करते हैं कि ठीक से सुने भी नही ठीक से देखे भी नहीं और ना ही गौर से सोचे बस फैसला कर लिए की क्या सही है क्या गलत है, ऐसे लोग हमेशा ही गलत फहमी का शिकार हो जाते हैं, बहुत ही कम समय मे फैसले ले लेते हैं और इसी का दूसरा नाम अति आत्मविश्वास है overconfidence है ।
इससे होने वाले नुकसान और घाटे के बारे मे जान लीजिये-पहले तो इंसान खुद की नजर मे गिरता है शर्मिंदा होता है,दूसरा के अन्य लोग समझते हैं कि वह बेवकूफ़ है पागल है आदि।
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बात करते हैं 7वें नंबर टाइप व्यक्ति की ये ओ इंसान होता है जिसे लगता है कि मुझे सब पता है मुझे सब कुछ आता है और मैं जितना जनता हू ओ किसी को क्या पता,अगर सीधी बात कहु तो उसे अपने आप पर बहुत घमंड होता है ego होता है वह अपनी ही सुनता है अपनी ही बोलता है सच बात तो यह है कि उसकी GK कमजोर होती है उसे लगने लगता है कि मैंने फल खाया तो मै जान गया की फल कैसा होता है कैसा लगता है उसे इस बात का ग्यान नही की फल अनेक प्रकार के होते हैं और सबके स्वाद भी अलग अलग होते हैं आकार भी अलग अलग होते हैं सबको खाने का तरीका भी अलग अलग होता है।
अगर मैं ए कह दु की इस प्रकार के लोगों को अति आत्मविश्वास की बीमारी है तो कोई अलग बात नही होगी।
मेरा ऐसे लोगों को सुझाव यह है कि आपको चाहिए कि अपनी जानकारी को बढ़ाना चाहिए अपना ego कम करना चाहिए,, मौलिक सोच रखनी चाहिए,दूसरों को कभी छोटा और कम नहीं समझने चाहिए सोच समझ कर हिस्सा फैसला लेना चाहिए,।
अब चलते हैं 8 नंबर की ओर, हर किसी इंसान की भविष्य को देखने की क्षमता एक समान नही हो सकती कोई दूर का भी सटीक सोच रखता है कोई पास का भी सटीक नही सोच पाता,जो दूरदर्शी होता है उसकी बात ही अलग है उनकी समाज मे मान सम्मान भी काफी होती है, पर जो जिनकी सोच स्पस्ट नही होती उनके लिए तो काफी परेशानियां होती हैं, उन्हे बार बार दूसरों की मदद लेनी पड़ती है ऐसे मेरे दोस्तों को चाहिए कि अपनी विवेक को बढ़ाना चाहिए,ऐसे लोग बोलने मे बहुत तेज होते हैं , बोलने मे इनलोगों से जीत पाना मुश्किल है बात बनाने की कला जन्म से ही मिला होता है,इन्हे चाहिए कि सप्ताह मे एक दिन इन्हे मौन व्रत करना चाहिए इससे होगा कि आपकी सोचने समझने की शक्ति बढ़ेगी, कभी कभी बोलने से ज्यादा जरूरी सुनना होता है तो जरूरी यह भी है कि बोले कम और सुने अधिक और समझे और भी अधिक।
अगर आपको ए लेख और सुझाव उपयोगी लगती हो तो fallow कर दीजिए कमेंट मे कोई सुझाव दे तो मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।
जहाँ छोटी छोटी बातों को लेकर कोई अति आत्मविश्वास हो तो ज्यादा फर्क नही पड़ता पर आजके युवा वर्ग अगर अपने भविष्य को लेकर ऐसे अति आत्मविश्वास होता है तो यह बहुत ही खतरनाक हो जाता है, युवाओं का भविष्य कभी कभी खतरे मे आ जाता है,सारा किया गया मेहनत पर पानी फिर जाता है, सबसे बहुमूल्य चीज समय की बर्बादी हो जाती है जो कभी वापस नहीं आती,
मेरा गुजारिश यह है कि कोई भी फैसला अपने भविष्य को लेकर करे तो अनुभवी लोगों की राय जरूर ले ले,अनुभवी से कहने का मतलब है कि जिसने सफलता प्राप्त की हो असफल लोग कभी भी सही है सुझाव नही देंगे इस बात का हमेशा ध्यान रखें।
धन्यवाद
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आपका
Prakash Patel
Prakash Patel





Nice Article, Thank you for sharing a wonderful blog post, I loved your blog post.
जवाब देंहटाएंYou can also check - अपना आत्मविश्वास कैसे बढ़ाये